जयपुर को “भिक्षावृत्ति मुक्त शहर” बनाने के लिए मंगलवार से पुलिस कमिश्नरेट ने समाज कल्याण विभाग के सहयोग से एक अभियान की शुरुआत की है। जिसमें शहर के विभिन्न चौराहों, धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, एवं सार्वजनिक स्थानों पर भिक्षावृत्ति में लिप्त व्यक्तियों को रेस्क्यू कर समाज कल्याण विभाग द्वारा चिन्हित दो केंद्रों, राजकीय अंबेडकर छात्रावास, जालूपुरा और सार्थक मानव कुष्ठ आश्रम, सामुदायिक भवन, थड़ी मार्केट शिप्रापथ पर भेजा जाएगा।
अभियान के संचालन के लिए एसीपी नरेंद्र दायमा के नेतृत्व में 4 पुलिस निरीक्षकों एवं 16 कांस्टेबलों की चार टीमों का गठन किया गया है। जयपुर शहर को भिक्षावृत्ति मुक्त शहर बनाने के लिए मंगलवार को अभियान के पहले दिन सुबह 10 बजे से बड़ी चौपड़, रामबाग चौराहा, गोपालपुरा पुलिया, 200 फीट बाईपास से अभियान का आगाज हुआ। जिसमें समाज कल्याण विभाग के निदेशक ओपी बुनकर, अतिरिक्त निदेशक एसएल पहाड़िया, सहायक परीक्षा अधिकारी रमेश दहमीवाल एवं उपनिदेशक मनोज शर्मा मौजूद रहे।
काउंसलिंग के बाद उन्हें राजकीय वृद्ध आश्रम, महिला सदन व नि:शक्त केंद्र भेजा जाएगा-
अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर अजयपाल लांबा ने बताया कि इन दोनों केंद्रों पर भिक्षावृत्ति में लिप्त लोगों की काउंसलिंग के बाद राज्य सरकार द्वारा संचालित वृद्धा आश्रम, महिला सेवा सदन, नि:शक्तजन केंद्रों में उन्हें भेजा जाएगा। वही रोजगार करने के इच्छुक भिखारियों को प्रशिक्षण दिलवाकर समाज की मुख्यधारा में सम्मिलित करने का प्रयास किया जाएगा। पुलिस कमिश्नरेट जयपुर के द्वारा दोनों केंद्रों पर 24 घंटे पुलिस टीम तैनात रहेगी, ताकि कोई भिखारी वहां से भाग न सके।
टीम के प्रभारी एसपी नरेंद्र दायमा ने बताया कि पिछले 2 महीने में शहर में करीब 3000 भिखारियों का सर्वे कर चिन्हित किया गया। इसके बाद उनकी जानकारी जुटाकर समाज कल्याण विभाग को दी गई थी। अब इन भिखारियों को शहर में विभिन्न स्थानों से हटाकर रेस्क्यू केंद्र भेजा जा रहा है।
अजय सिंह भाटी (मार्मिक धारा)