जयपुर, राजस्थान की राजनीति में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट की खींचतान के कारण मंत्रिमंडल विस्तार कई महीनों से अटका हुआ है। जिसके कारण राजनीतिक नियुक्तियां नहीं हो रही है। जैसा कि राजस्थान की जनता को मालूम है मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एवं सचिन पायलट दोनों के बीच सियासी माहौल गरमा हुआ था। लेकिन अब लग रहा है कि कुछ संबंधों में मिठास आने के समीकरण बन रहे हैं।
वर्तमान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सचिन पायलट को दिया महत्व।
जब से सचिन पायलट एवं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच खींचतान शुरू हुई। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सचिन पायलट को साइडलाइन कर दिया। जिसका सचिन पायलट ने समय-समय पर विरोध किया। एक बार समीकरण इस तरीके से बन गए हैं की राजस्थान की जनता को लगा। शायद सचिन पायलट कांग्रेस पार्टी को छोड़ देंगे। लेकिन सचिन पायलट ने पार्टी में रहकर ही लगातार विरोध किया। कांग्रेस पार्टी में नया सियासी समीकरण बनने का संकेत माना जा रहा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में राजीव गांधी के जीवन पर आधारित वीडियो रिलीज करने के मौके पर जिस तरह सचिन पायलट को महत्व दिया गया उससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि समीकरणों के बदलने की शुरुआत हो चुकी है। राजीव गांधी के जीवन पर आधारित शॉर्ट वीडियो फिल्म को डोटासरा ने सचिन पायलट से जारी करवाया।
सचिन पायलट एवं मुख्यमंत्री ने वीडियो जारी किया।
राजीव गांधी जयंती पर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में 15 अगस्त को जिस जगह मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा वीडियो रिलीज किया। उसी जगह ठीक 5 दिन बाद सचिन पायलट से राजीव गांधी के योगदान पर वीडियो जारी किया। कांग्रेस की सियासत में इस बात से कई अंदाजे लगाए जा रहे हैं।
पीसीसी के प्रेस नोट में सचिन पायलट का नाम नहीं।
सचिन पायलट से प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा ने वीडियो तो जारी करवाया, लेकिन जब इस कार्यक्रम को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का प्रेस नोट जारी हुआ तो उसमें केवल गोविंद सिंह डोटासरा का नाम ही आया। जबकि इस कार्यक्रम में सचिन पायलट के साथ वरिष्ठ कांग्रेस नेता महेश जोशी भी शामिल थे। दोनों नेताओं का प्रेस नोट में नाम नहीं था।
अजय माकन अशोक गहलोत एवं सचिन पायलट से निरंतर संपर्क में हैं।
सचिन पायलट पिछले लंबे समय से बिल्कुल चुप हैं, उन्होंने कांग्रेस की सियासत पर कोई बयान नहीं दिया है। इसके पीछे का कारण प्रदेश प्रभारी अजय माकन का सचिन पायलट एवं अशोक गहलोत से लगातार संपर्क है। अब देखना है राजनीतिक नियुक्तियों में सचिन पायलट कितना फायदा उठा पाते हैं।जिस तरीके से पीसीसी के कार्यक्रम में सचिन पायलट को महत्व मिला है। कांग्रेस की राजनीतिक नियुक्तियों में भी यह कितना बरकरार रहता है?
हर्षवर्धन शर्मा (मार्मिक धारा)