जयपुर मेट्रो प्रथम की एसीएमएम कोर्ट- 8 ने ग्रेटर निगम कमिश्नर से अभद्रता व मारपीट में सोमवार को आरोपी निलंबित पार्षद पारस जैन, अजय सिंह व पार्षद रामकिशोर प्रजापत की जमानत अर्जी खारिज कर दी। तीनों पार्षदों को न्यायिक हिरासत में भेजने का निर्देश दिया है।
पीठासीन अधिकारी अमित शर्मा ने कहा पत्रावली से साफ है कि लोक सेवक ने आरोपियों पर राजकार्य में बाधा व मारपीट में एफ आई आर दर्ज कराई है। लोक सेवक से मारपीट करना गंभीर अपराध है। इसलिए जमानत नहीं दी जा सकती।
कोर्ट ने जमानत याचिका की खारिज-
कोर्ट ने पिछले दिनों वारंट जारी करने के बाद तीनों पार्षदों ने 11:30 बजे कोर्ट में सरेंडर किया था। एक अन्य आरोपी शंकर शर्मा ने किडनी की बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती होने का हवाला देकर पेश होने में असमर्थता जताई थी। तीनों पार्षदों की ओर से अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह नरूका व सतीश शर्मा ने कहा कि उन्हें मामले में राजनीतिक द्वेष के चलते फंसाया गया है।
4 जून को विवाद हुआ था जिसमें सौम्या को मिली थी बेल-
नगर निगम कमिश्नर यज्ञ मित्र सिंह ने सौम्या गुर्जर तत्कालीन पार्षद पारस जैन, अजय सिंह, शंकर शर्मा और रामकिशोर प्रजापत के खिलाफ मारपीट और अभद्रता करने का आरोप लगाते हुए ज्योति नगर थाने में एफ आई आर दर्ज कराई थी। जिस पर अनुसंधान करते हुए पुलिस ने 1 जुलाई को सौम्या सहित चारों पार्षदों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया था।
कोर्ट ने चालान पर प्रसंज्ञान लेते हुए सौम्या के अलावा अन्य चारों आरोपियों की गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। इस मामले में कोर्ट ने सौम्या गुर्जर को जमानत दे दी थी। नगर निगम कमिश्नर यज्ञ मित्र सिंह ने सौम्या गुर्जर, पार्षद पारस जैन, अजय सिंह, शंकर शर्मा और रामकिशोर प्रजापत पर मारपीट और अभद्रता का केस दर्ज कराया था।
अजय सिंह भाटी (मार्मिक धारा)