जब धाराप्रवाह दस्त होने लगते हैं तब मूत्र का परिमाण कम हो जाता है और जब मूत्र का दस्त ( मूत्रातिसार ) होने लगता है तब मल खुस्क हो जाता है।
इसे इस तरह भी समझ सकते हैं — गुदा मार्ग से जब पानी मिला हुआ मल प्रवाहित होता है तो अधिकांश पानी गुदा द्वार से ही निकल जाता है जिसकी वजह से मूत्र का परिमाण कम हो जाता है और जब मूत्र प्रभूत मात्रा में प्रवाहित होता है तो अत्यधिक पानी की मात्रा मूत्र मार्ग से निकल जाने के कारण मल खुस्क हो जाता है।
एक बारीक तथ्य
दस्त बंद करने के लिए मूत्र का परिमाण बढ़ा दीजिए मल अपने आप खुस्क हो जाएगा यानी दस्त थम जाएंगे। और यदि मूत्र अधिक परिमाण में आ रहा हो तो मल को पतला करने की व्यवस्था कीजिए मूत्र अपने आप थम जाएगा।
अब मधुमेह के रोगी को देखिए
मधुमेह रोगी को मूत्र अधिक परिमाण में निकलता है और यही वजह है कि मधुमेही को मल खुस्क होता है।
यही स्थिति मूत्रातिसार और बहुमूत्रता के रोगी में भी देखी जाती है।
आयुर्वेद एक सैद्धांतिक तौर पर समूल रोग निवारक चिकित्सा पद्धति ही नहीं है बल्कि स्वस्थ जीवन जीने का भी अनुपम विज्ञान है।
भानु प्रकाश शर्मा (मार्मिक धारा)