पाठकों आज विश्व आत्महत्या निवारण दिवस है। स्वास्थ्य के संबंध में चर्चा करते हुए हम आज तनाव से संबंधित चर्चा करते हैं। इस समय जो कोरोना काल रहा है। ज्योतिषियों के मतानुसार यह वर्ष राहुकाल का है जो कि प्रति 100 वर्षों में एक बार आता है। इस समय भी हम देखे तो अत्यधिक मामले आत्महत्या के आ रहे हैं। लोगों की व्यापार पूर्ण रूप से ठप्प हो गए हैं। लोगों की नौकरियां पूर्णत समाप्त हो गई। जो व्यापारी अपना व्यापार किराए की जगह पर कर रहे हैं। उनकी स्थिति भी बहुत तबीयत खराब हो गई है वह अपना किराए का पैसा भी नहीं दे पा रहे हैं। ऐसी विकट परिस्थिति में लोग बड़ी आसानी से डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। इसीलिए कोरोना काल में आत्महत्याओं की घटनाएं बढ़ गई है। इस तनाव को कम करने का साधन धार्मिक किताबें तथा अपनी जिंदगी के खुशनुमा पलों को याद करके भी तनाव कम किया जा सकता है। आप जिस भी व्यापारी नौकरी में हैं। इस समय अपने स्किल सुधारने की कोशिश करें।
प्राचीन काल में इस तरीके की कोई बीमारी नहीं थी। क्योंकि हमारे सनातन धर्म को इस तरीके से निर्माण किया गया है साल के प्रत्येक दिन त्योहार रहता है। इसलिए भारतीय लोग अत्यधिक प्रसन्न रहते हैं। जब से पश्चिमी संस्कृति तथा एकल जिंदगी जीने लगे हैं। तब से डिप्रेशन का शिकार होने लगे हैं।
डिप्रेशन के लक्षण
- अत्यधिक वजन बढ़ना या वजन कम होना।
- हमेशा चिड़चिड़ापन या बात-बात पर चिल्लाना।
- अत्यधिक भूख लगना, नींद न आना या अत्यधिक नींद आना।
- शरीर के विभिन्न भागों में दर्द या बेचैनी।
- नशे की इच्छा होना।
- बात बात पर रोने लग जाना।
यह सारे लक्षण तनाव के है। यदि कोई व्यक्ति तनाव ग्रस्त है। उसे बहुत अधिक देखभाल की आवश्यकता होती है। ऐसे व्यक्ति को अकेले नहीं छोड़ना चाहिए। यदि आप सुबह सूर्योदय से पहले जागकर अपनी संतुलित दिनचर्या में व्यस्त हो जाएं तो तनाव आपको छू नहीं सकता। अपने काम में व्यस्त, किताबें पढ़ें, अपने मित्रों से बातें करें। जीवन में उमंग और आशा से लवरेज रहे हैं। जो कि कार्य आप करते हैं। उसे रच पच कर करें अर्थात उस कार्य को बड़ी सुंदरता से करें जब आप अपने कार्यों को बड़ी सुंदरता पूर्णता से करते हैं। तो आपको अत्यधिक हर्ष महसूस होता है। और एक दिन आप उस कार्य में सफल हो जाएंगे। दुनिया का सारा तनाव इस बात का है। हम जल्दबाजी में कार्य करते हैं। ना तो कार्य अच्छा होता है और हमारा समय खराब हो जाता है। एक असफल होने पर दोबारा प्रयास नहीं करते हैं। एप्पल के मालिक 35 साल में नौकरी में खराब प्रदर्शन के कारण कंपनी ने उन्हें निकाल दिया था लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत से एप्पल जैसी कंपनी को खड़ा कर दिया। जब भी चिंता हो तो ईश्वर को याद करें। खुश रहने की कोशिश करें। खुश होने की एक्टिंग से भी हम खुश रह सकते हैं।
“व्यस्त रहें और मस्त रहें”। और अपना जीवन सकारात्मक तरीके से जियो नकारात्मक चीजों की ओर आकर्षित ना हो।
हर्षवर्धन शर्मा (मार्मिक धारा)