जयपुर- कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप के कारण राजस्थान के अधिवक्ताओं की स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है | प्रदेश में वर्तमान में कोरोना महामारी के कारण लगभग 15 अधिवक्ताओं की मौत हो चुकी है और आर्थिक संकट से जूझने के कारण 3 अधिवक्ताओं ने आत्महत्या कर ली |
वर्तमान में राजस्थान की अदालतें काफी लंबे समय से बंद है और उनमें केवल अत्यावश्यक कार्य वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हो रहे हैं| इसके अतिरिक्त स्थिति ऐसी है कि आम अधिवक्ता को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है जिसके चलते बार कौंसिल ऑफ राजस्थान के द्वारा सरकार को पत्र लिखकर 100 करोड रुपए का फंड कोविड-19 महामारी के चलते अधिवक्ताओं के लिए जारी करने की मांग की है | उक्त पत्र में अधिवक्ताओं की समस्या के साथ यह इंगित किया है कि लगभग 7 महीनों से न्यायिक कार्यों के बंद होने की वजह से अधिवक्ताओं की आर्थिक स्थिति बहुत ही खराब हो गई है |
उक्त पत्र में बार काउंसिल अध्यक्ष श्री शाहिद हसन ने मुख्यमंत्री को बताया है कि 22 मार्च के बाद से ही प्रदेश की समस्त अदालतों में न्यायिक कार्य लगभग बंद है | जिससे युवा अधिवक्ताओं को भारी मानसिक और आर्थिक परेशानी उठानी पड़ रही है | कोविड-19 वजह से लगभग 300 अधिवक्ता अभी भी प्रदेश में संक्रमित है | बार कौंसिल द्वारा अपनी तरफ से लगभग 4 करोड़ की सहायता राशि अधिवक्ताओं को दी है लेकिन प्रदेश में रजिस्टर्ड वकीलों की संख्या लगभग 90,000 है | ऐसी स्थिति में उनकी सहायता हेतु सरकार को पहल की जानी चाहिए| सरकार को इस हेतु एडवोकेट फंड में 100 करोड़ की राशि स्वीकृत की जानी चाहिए और कोरोना से मरने वाले अधिवक्ताओं के लिए 10 – 10 लाख रुपए की राशि उनके परिजनों को दी जानी चाहिए|
भानु प्रकाश शर्मा (मार्मिक धारा)
हर्षवर्धन शर्मा (मार्मिक धारा)