पाठकों आज हम कोरोना जैसी बीमारी पर हम चर्चा कर रहे हैं। कोरोना बीमारी अपनी चरम सीमा पर है। यह बीमारी इस समय अपना रौद्र रूप दिखा रही है। डॉक्टर, नर्स अपना पूरा प्रयास कर रहे हैं। लेकिन नासमझ लोग इस बीमारी को बीमारी नहीं मान रहे हैं तथा इस बीमारी से बचाव ना करना अपनी शान मान रहे हैं लेकिन यह कोरोना नामक बीमारी किसी को भी नहीं छोड रही है। 25 नवंबर को मेरे फूफा जी रमेश चंद शर्मा का निधन भी इस बीमारी से हो गया। डॉक्टर सरकार जितना प्रयास कर सकते हैं वह कर रहे हैं। लेकिन मित्रों हमारा भी कुछ दायित्व बनता है। हम इस बीमारी से अपना बचाव करें। दिसंबर, जनवरी, फरवरी के महीने बड़े खतरनाक निकलेंगे। इसलिए मार्मिक धारा परिवार भारत के सभी नागरिकों के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हैं। जयपुर में पढ़े-लिखे लोग फिर भी इस बीमारी से बचाव कर रहे हैं। लेकिन मेट्रो सिटी व राजधानी से बाहर छोटे शहर व गांव में इस बीमारी को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। जापान के नागरिक सबसे सभ्य और अनुशासित नागरिक माने जाते हैं। उन्होंने करके दिखा दिया। जापान में कुछ दिनों लॉकडाउन लगा और फिर लांक डाउन के कुछ ही दिनों बाद जापानी लोग पुनः काम पर पूर्ण बचाव के साथ लौट आए। वहां कोई आर्थिक संकट नहीं आया। वहां इस बीमारी से मरने वालों का मृत्यु दर भी ना के बराबर है। उसका कारण जापान के अनुशासित नागरिक जोकि अपने देश के बारे में पूर्ण समर्पित हैं। जापान में कोई व्यापारिक कार्य नहीं रुका बल्कि लगातार कार्य होते रहे। भारत में आज इस कोरोना बीमारी की भयावहता जनता को समझ में नहीं आ रही है। सरकारी आंकड़ों पर मत जाइए। सरकार की मजबूरी है कि वह वास्तविक आंकड़े नहीं बता सकती। लेकिन आप एक बार अस्पताल में जाकर जो सबका दाह करते हैं। उनके पास जाकर पूछोगे तो वास्तविक स्थिति का पता लगेगा।
हमारे फूफाजी रमेश चंद शर्मा जी के उपचार के दौरान मैंने देखा कि मौत कैसे अपना तांडव कर रही है? इसलिए मित्रों हमारा भारत के सभी नागरिकों से निवेदन है, कृपया इस बीमारी की भयावहता को समझें। क्योंकि जिन लोगों के घर पर इस बीमारी से कोई हानि पहुंची है। वहीं इसकी वास्तविकता को बता सकते हैं।
हर्षवर्धन शर्मा (मार्मिक धारा)