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कोऑपरेटिव बैंकों की धोखाधड़ी पर लगाम

by marmikdhara
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नई दिल्ली, लोकसभा में बैंकिंग रेगुलेशन (अमेंडमेंट) बिल 2020 पारित हुआ। इस बिल के द्वारा कॉपरेटिव बैंकों को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की निगरानी में लाने का प्रस्ताव रखा गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा की कोऑपरेटिव बैंकों के गवर्नेंस में सुधार करने और जमाकर्ताओं के पैसे की सुरक्षा के लिए यह विधेयक लाया गया है। मार्च 2020 में कोऑपरेटिव बैंकों का ग्रॉस एनपीए 7.27 फीसदी था जो मार्च 2020 में बढ़कर 10 फीसदी से ज्यादा हो गया था।
कोऑपरेटिव बैंकों में अब तक आरबीआई का कोई नियंत्रण नहीं था। कॉपरेटिव बैंक आरबीआई में कोई सिक्योरिटी जमा नहीं कराते थे तथा अपने खातों को आरबीआई से नहीं जोड़ते थे। जबकि एनबीएफसी (नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी) को आरबीआई में सिक्योरिटी जमा करवानी पड़ती है तथा आरबीआई का पूर्ण नियंत्रण एनबीएफसी पर होता है।
जब एनबीएफसी ढंग से नहीं चलती है तो आरबीआई उस पर कब्जा कर ग्राहकों के पैसे को बचा लेता है। जब भी कोऑपरेटिव बैंक इन चीजों से स्वतंत्र थे। इसलिए ग्राहकों का पैसा डूब जाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। इस विधेयक के बाद कॉपरेटिव बैंक की स्वतंत्रता खत्म हो जाएगी और वह आरबीआई के नियंत्रण में आ जाएगा
इस प्रकार कॉपरेटिव बैंकों पर आरबीआई का पूर्ण नियंत्रण हो जाएगा।

हर्षवर्धन शर्मा (मार्मिक धारा)

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