नई दिल्ली, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता कन्हैया लाल जोकि 2016 में जेएनयू में देश विरोधी नारेबाजी करने से चर्चा में आए। कन्हैया लाल आज कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं। कांग्रेस में शामिल होने से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया पर कहा कि कुछ कम्युनिस्ट नेताओं के कांग्रेस ज्वाइन करने से कांग्रेस को क्षति होने की संभावना है। ऐसे में शायद 1973 में लिखी गई किताब “कम्युनिस्ट इन कांग्रेस”तो फिर से पढ़ा जाना चाहिए उन्होंने ट्विटर पर कहा चीजें जितनी बदलती है उतनी ही यह समान रहती है। मैंने आज इसे फिर पढा है।
कन्हैया कुमार के अलावा गुजरात के दलित कार्यकर्ता और विधायक जिग्नेश मेवानी भी कांग्रेस में शामिल।
देश विरोधी नारे लगाने वाले कन्हैया कुमार के साथ गुजरात के दलित कार्यकर्ता और विधायक जिग्नेश मेवानी भी कांग्रेस में शामिल होने वाले हैं। दिल्ली में होने वाले कार्यक्रम में इन्हें राहुल गांधी कांग्रेस की सदस्यता दिलाएंगे और इस कार्यक्रम के दौरान पाटीदार नेता हार्दिक पटेल भी शामिल होंगे। लगातार हार झेलते हुए। कॉन्ग्रेस अब नए-नए दांव खेल रही है। वह किसी भी तरह पुनः सत्ता प्राप्त करने के लिए प्रयासरत है। इसलिए नए नए प्रयोग किए जा रहे हैं।
कन्हैया के कांग्रेस ज्वाइन करने की संभावना पिछले काफी समय से जारी थी।
जेएनयू में देश विरोधी नारे लगाने वाले कन्हैया लाल के कांग्रेस ज्वाइन करने की संभावना पिछले काफी समय से चल रही थी। पिछले हफ्तेCPI महासचिव डी राजा ने उनसे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अफवाहों को खारिज करने को कहा था। दिल्ली के पार्टी के दफ्तर में केंद्रीय नेता उनका इंतजार कर रहे थे पर कन्हैया नहीं पहुंचे और पार्टी नेताओं के मैसेज और फोन कॉल का जवाब भी नहीं दिया। कन्हैया और जिग्नेश ने पिछले दिनों राहुल गांधी से मुलाकात भी की थी
बीजेपी ने कहा कांग्रेस ने देश विरोधी ताकतों को साथ जोड़ लिया है।
बीजेपी के आईटी सेल के प्रभारी अमित मालवीय ने कहा इस सर्जिकल स्ट्राइक की एनिवर्सरी पर कांग्रेस “भारत तेरे टुकड़े होंगे”फेम कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवानी को शामिल कर रही है।”भारत तोड़ो” फोर्स से हाथ मिलाना कांग्रेस ने अपना मकसद बना लिया है। बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने कहा कन्हैया लाल एक राष्ट्र विरोधी नेता है।
जेएनयू में देश विरोधी नारेबाजी से चर्चा में आए थे कन्हैया लाल
जेएनयू में 2016 में कन्हैया कुमार ने कथित देश विरोधी नारेबाजी से पहली बार चर्चा में आए थे। उनका एक वीडियो सामने आया था। जिस में वह भी आजादी के नारे लगा रहे थे। इस विवाद के समय कन्हैया कुमार जेएनयू में छात्रसंघ अध्यक्ष थे। फिर 2019 में लोकसभा चुनाव से पहले वहCPI में शामिल हो गए थे। उन्होंने बेगूसराय से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन बीजेपी के गिरिराज सिंह से बुरी तरह से हार गए थे। अपनी इस देश विरोधी छवि के कारण कन्हैया कुमार को जगह जगह आलोचना का सामना करना पड़ा। और अब वह कॉन्ग्रेस की छवि को सुधारने की कोशिश करेंगे। तथा देश में कांग्रेस को जिताएंगे।
कन्हैया के आने से कांग्रेस को कहां फायदा हो सकता है।
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ऐसा सोचते हैं कि बिहार में जदयू और राजद जैसी क्षेत्रीय पार्टियों की बात करें या बीजेपी कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियों की, सभी पार्टियों में दूसरी लाइन के नेता आगे आ रहे हैं। राजद में तेजस्वी ने कमान संभाल रखी है। लोक जनशक्ति पार्टी का नेतृत्व चिराग पासवान के पास है। जदयू के नीतिश पहले ही कह चुके हैं कि अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। बीजेपी ने भी सुशील कुमार मोदी को मुख्य जिम्मेदारी से हटाकर संकेत साफ कर रखे हैं। ऐसे में कांग्रेस के पास कोई युवा नेता नहीं है, जो लंबी दूरी का घोड़ा बन सके। इसलिए उसे कन्हैया में संभावनाएं नजर आ रही है, जो लंबे समय में राज्य स्तर पर पार्टी को मजबूती दे सकते हैं।
जिग्नेश मेवानी का काफी समय से कांग्रेस में शामिल होने की संभावना थी।
सूत्रों के अनुसार जिग्नेश के खिलाफ 2017 में कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था। क्योंकि कांग्रेस का प्रयास था जिग्नेश मेवानी को अपने साथ शामिल किया जाए। जिग्नेश मेवानी गुजरात में कई आंदोलनों में लोगों को इकट्ठा कर दलित राजनीति के युवा चेहरे के तौर पर उभर कर सामने आए हैं। वह गुजरात के वड़गाम से निर्दलीय विधायक है। ऐसा माना जाता है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में जिग्नेश की जीत में कांग्रेस की भूमिका मुख्य रही है। क्योंकि कांग्रेस ने उनके खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था। अब कांग्रेस जिग्नेश और पाटीदार नेता हार्दिक पटेल के जरिए गुजरात में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में बढ़त हासिल करने की कोशिश करेगी। कॉन्ग्रेस बीजेपी के गण गुजरात को तोड़ने के लिए पूरी कोशिश करेंगी।
हर्षवर्धन शर्मा (मार्मिक धारा)