Home Religious हमारे वेदों में कन्या पूजन का महत्व बताया गया

हमारे वेदों में कन्या पूजन का महत्व बताया गया

by marmikdhara
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नौ दुर्गा का मतलब नौ वर्ष की कन्या की पूजा करना होता है. कन्या पूजन दो वर्ष की कन्या से शुरू किया जाता है.

2 वर्ष की कन्या को ‘ कुमारिका ‘ कहते हैं और इनके पूजन से धन , आयु , बल की वृद्धि होती है .

3 वर्ष की कन्या को ‘ त्रिमूर्ति ‘ कहते हैं और इनके पूजन से घर में सुख समृद्धि आती है .

4 वर्ष की कन्या को ‘ कल्याणी ‘ कहते हैं और इनके पूजन से सुख तथा लाभ मिलते हैं .

5 वर्ष की कन्या को ‘ रोहिणी ‘ कहते हैं इनके पूजन से स्वास्थ्य लाभ मिलता है .

6 वर्ष की कन्या को ‘ कालिका ‘ कहते हैं इनके पूजन से शत्रुओं का नाश होता है .

7 वर्ष की कन्या को ‘ चण्डिका ‘ कहते हैं इनके पूजन से संपन्नता ऐश्वर्य मिलता है .

8 वर्ष की कन्या को ‘ साम्भवी ‘ कहते हैं इनके पूजन से दुःख-दरिद्रता का नाश होता है .

9 वर्ष की कन्या को ‘ दुर्गा ‘ कहते हैं इनके पूजन से कठिन कार्यों की सिद्धि होती है .

10 वर्ष की कन्या को ‘ सुभद्रा ‘ कहते हैं इनके पूजन से मोक्ष की प्राप्ति होती है
.
9 कुँवारी कन्या का पूजन करे और उन्हे उपहार दे

क्यों (माँ भगवती) का नाम माँ दुर्गा पड़ा?

पुरातन काल में दुर्गम नाम का एक अत्यंत बलशाली दैत्य हुआ करता था। उसने ब्रह्माजी को प्रसन्न कर के समस्त वेदों को अपनें आधीन कर लिया, जिस कारण सारे देव गण का बल क्षीण हो गया। इस घटना के उपरांत दुर्गम नें स्वर्ग पर आक्रमण कर के उसे जीत लिया।और तब समस्त देव गण एकत्रित हुए और उन्होने देवी माँ भगवती का आवाहन किया और फिर देव गण नें उन्हे अपनी व्यथा सुनाई। तब माँ भगवती नें समस्त देव गण को दैत्य दुर्गम के प्रकोप से मुक्ति दिलाने का आश्वासन दिया।

माँ भगवती नें दुर्गम का अंत करने का प्रण लिया है, यह बात जब दुर्गम को पता चली तब उसने स्वर्ग लोक पर पुनः आक्रमण कर दिया। और तब माँ भगवती नें दैत्य दुर्गम की सेना का संहार किया और अंत में दुर्गम को भी मृत्यु लोक पहुंचा दिया। माँ भगवती नें दुर्गम के साथ जब अंतिम युद्ध किया तब उन्होने भुवनेश्वरी, काली, तारा, छीन्नमस्ता, भैरवी, बगला मुखी मां पद्मावती मां पीतांबरा मां विंध्यवासिनी और अनेक नामों से जाना जाता था तथा दूसरी अन्य महा शक्तियों का आवाहन कर के उनकी सहायता से दुर्गम को पराजित किया था। इस भीषण युद्ध में विकट दैत्य दुर्गम को पराजित करके उसका वध करने पर माँ भगवती दुर्गा नाम से प्रख्यात हुईं।

भानु प्रकाश शर्मा (मार्मिक धारा)

हर्षवर्धन शर्मा (मार्मिक धारा)   www.Marmikdhara.in.(Hindi)
                                          www.Marmikdhara.com(English)

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