महाभारत में शकुनि का किरदार निभाने वाले गूफी पेंटल का सोमवार सुबह निधन हो गया। वे 78 साल के थे। पेंटल पिछले दो हफ्ते से मुंबई के अंधेरी स्थित अस्पताल में भर्ती थे। गूफी को दिल और किडनी संबंधी बीमारी थी। गूफी के भतीजे, हितेन पेंटल और महाभारत में उनके साथी कलाकार सुरेंद्र पाल ने निधन की पुष्टि की है। आज शाम 4 बजे से 5 बजे के बीच ओशिवारा श्मशान भूमि पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।एक हफ्ते पहले गूफी की तबीयत बिगड़ी थी। उस वक्त वे फरीदाबाद में थे। पहले उन्हें फरीदाबाद के एक हॉस्पिटल में एडमिट किया गया। फिर कंडीशन खराब होने पर उन्हें मुंबई लाया गया।
गूफी पेंटल ने महाभारत के शकुनि के रूप में बहुत ही मशहूरता प्राप्त की थी। उनका अभिनय और प्रतिभा लोगों के दिलों में रहा है। उन्होंने टेलीविजन सीरियल्स, फिल्मों और नाटकों में अपनी अदाकारी से लोगों को मंत्रमुग्ध किया था। उन्होंने कई सालों तक अपने अभिनय का जादू दर्शकों के दिलों में छोड़ा है।
फिल्म रफू चक्कर से डेब्यू किया, महाभारत से घर-घर पहचान मिली
गूफी ने 1975 में ‘रफू चक्कर’ से बॉलीवुड डेब्यू किया था। 80 के दशक में वे कई फिल्मों और टीवी शोज में नजर आए। हालांकि, गूफी को असल पहचान 1988 में बीआर चोपड़ा के सुपरहिट शो ‘महाभारत’ से मिली थी। शो में उन्होंने शकुनि मामा का किरदार निभाया था। गूफी आखिरी बार स्टार भारत के शो ‘जय कन्हैया लाल की’ में नजर आए थे।
गूफी ने भास्कर को बताया था आर्मी जवान से शकुनि बनने का सफर
एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने से पहले गुफी पेंटल आर्मी में थे। दैनिक भास्कर से हुई खास बातचीत में पेंटल आर्मी जवान से शकुनि बनने की कहानी शेयर की थी। उन्होंने कहा था, “1962 में भारत-चीन के बीच जब युद्ध चल रहा था, तब मैं इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। युद्ध के दौरान भी कॉलेज में आर्मी की भर्तियां चल रही थीं। मैं हमेशा से आर्मी में जाना चाहता था। पहली पोस्टिंग चीन बॉर्डर पर आर्मी आर्टिलरी में हुई थी।
बॉर्डर पर मनोरंजन के लिए टीवी और रेडियो नहीं होता था इसलिए हम बॉर्डर पर (सेना के जवान) रामलीला करते थे। रामलीला में मैं सीता का रोल करता था और रावण बना शख्स स्कूटर पर आकर मेरा अपहरण करता था। मुझे एक्टिंग का शौक तो था ही, इससे कुछ ट्रेनिंग भी मिल गई।”