जोधपुर में फलोदी के देणोक के पास स्थित रणीसर गांव के पास एक ढाणी में ट्रक ड्राइवर गोपीलाल विश्नोई उनकी पत्नी शांति देवी और उनका बेटा बालकिशन रहते थे | 10वीं बोर्ड की पढ़ाई के लिए बालकिशन गांव से दो किलोमीटर दूर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पड़ियाल में पढ़ने जाता था। पड़ियाल स्कूल में 10 दसवीं क्लास के स्टूडेंट के बोर्ड के एग्जाम शुरू होने वाले थे। ऐसे में स्कूल में गत 26 फरवरी को स्टूडेंट के लिए फेयरवेल का प्रोग्राम रखा था। इस दौरान हिस्ट्री के लेक्चरर कुलदीप खावा की प्ले ग्राउंड में खड़ी कार पर स्क्रैच लग गए। इसके बाद टीचर ने बार-बार बच्चों से पूछताछ की। इसी दौरान कुछ बच्चों ने बालकिशन पर स्क्रैच करने का संदेह जताया।
टीचर कुलदीप खावा ने बालकिशन को बुलाकर धमकाया और स्क्रैच के बारे में पूछा। दबाव बनाया कि वो स्क्रैच लगाने की गलती स्वीकार कर ले और जुर्माने के 50 हजार रुपए दे। बालकिशन ने स्क्रेच के लिए मना किया पर फिर भी टीचर एक हफ्ते तक बालकिशन पर दबाव बनता रहा | टीचर ने एक दिन बालकिशन को दोपहर 2 बजे स्कूल में बुलाया | इसके बाद भी बालकिशन के न मानने के बाद उसे प्रिंसिपल ऑफिस में करीब आधे घंटे तक बंद करके रखा। गलती नहीं मानी तो कुलदीप ने टॉर्चर को और बढ़ा दिया। उसने बालकिशन को वहीं मुर्गा बना दिया। काफी देर तक मुर्गा बनाने के बाद बालकिशन के सहने की क्षमता खत्म हो गई थी। उसने कार पर स्क्रैच लगाने की बात स्वीकार कर ली।
बालकिशन के पिता ने बताया कि टीचर कुलदीप ने स्कूल में सभी बच्चों के सामने हाथ-जोड़कर माफी तक मंगवाई। इसके बाद भी जुर्माने के 50 हजार रुपए देने के लिए दबाव बनाया। और पैसे न देने पर बोर्ड एग्जाम में न बैठाने की धमकी दी | बालकिशन की मां शांतिदेवी ने बताया कि 11 मार्च के दिन मैं खेतों का काम करने गई थी। घर आई तो बालकिशन फूट-फूटकर रोने लगा। पूछने पर उसने आपबीती बताई। बेटे को तनाव में देखकर मैं डर गई और मदद के लिए पड़ोस में रहने वाली देवरानी को बुलाने गई। देवरानी के साथ घर वापस लौटी तो बालकिशन घर में नहीं था।
इसके बाद रिश्तेदार और गांव वालों ने बालकिशन की तलाश शुरू कर दी। कुछ लोगों ने घर के पास बने टांके में देखा। उसमें बालकिशन का शव दिखाई दिया। इसके बाद परिजनों ने भोजासर थाने की पुलिस को सूचना कर शव को बाहर निकलवाया। इस घटना के बाद से आरोपी टीचर कुलदीप फरार है।