✍️ गौरव शर्मा।
राजनीति में सभी धर्म व जाति का अपना स्थान है इसी प्रकार ब्राह्मण समुदाय से भी 90 के दशक तक राजस्थान में 5 मुख्यमंत्री हुए थे।
लेकिन उसके बाद राजस्थान में या कहे देश की राजनीति में ब्राह्मणों का वर्चस्व पतन की ओर चला गया।
राजस्थान की बात करें तो पिछले तीन दशक से यहां पर कोई समाज का नेता उबर का नहीं आ पाया है। विधायक सांसद अथवा मंत्री स्तर तक ही ब्राह्मण समुदाय अपनी पहुंच बना पाया है। राजस्थान में जनसंख्या की दृष्टि से दूसरे स्थान पर आने वाले समुदाय में नेतृत्व की कमी साफ झलकती है। घटना के 8 दिन बीत जाने पर भी अभी तक सभी आरोपी पकड़े नहीं गए है।
पुजारी को जब जिंदा जलाया गया, तब भी समाज के नेतृत्व का अभाव लक्षित हुआ।
हृदय विदारक घटना के बाद भी
समाज से जुड़े विधायक और मंत्री को करौली घटनास्थल पर पहुंचने में काफी समय लग गया और पहुंचने के बाद भी उनके द्वारा कोई विशेष सहायता नहीं हो पाई।
दिल्ली से अगर कपिल मिश्रा आगे बढ़कर इस परिवार की मदद नहीं करते तो राजस्थान में इस परिवार को कोई संभालने वाला कोई नहीं था। राज्यसभा सांसद किरोड़ी मीणा ने घटना की वस्तुस्थिति समझते हुए तुरंत ही सरकार और जिम्मेदार लोगों पर दबाव बनाया जिसके बाद ही सरकारी स्तर पर ₹10 लाख की घोषणा व संविदा पर नौकरी की बात हो सकी।
इसके अतिरिक्त पुजारी परिवार को राज्यसभा सांसद किरोड़ी मीणा अलवर सांसद महंत बालक नाथ योगी, करौली धौलपुर के सांसद मनोज राजोरिया द्वारा ₹ 1लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की गई।
अगर ब्राह्मणों के संगठन के लिए ने तो राजस्थान में कोई एक लाख संगठन होंगे लेकिन समय पर पुजारी परिवार के साथ मजबूती से कोई खड़ा नहीं हो पाया और आज भी यही हालात है।
आरोपियों को पकड़ने के संबंध में अथवा ब्राह्मण परिवार को न्याय दिलाने के लिए ब्राह्मण जाति से जुड़े वर्तमान व पूर्व सांसद मंत्री और विधायकों ने अपने मुंह पर चुप्पी लगा रखी है।
स्पष्ट है कि राजस्थान में इस जाति के नेता स्वयं को समाज का चेहरा नहीं बना पाए हैं और इसी का कारण रहा है कि सामान्य वर्ग के सीट पर चुनाव होने पर भी ब्राह्मण नेताओं को या तो टिकट मिल नहीं पाता है और टिकट मिल जाता है तो वह अपनी जीत दर्ज नहीं करा पाते हैं । जबकि अन्य जो सामान्य वर्ग से जातियां हैं वह अपना वर्चस्व राजनीति में अभी भी कायम किए हुए हैं और स्वयं को स्थापित किए हुए हैं। राजस्थान में ब्राह्मण जाति से जुड़े सभी वर्ग को इस विषय पर मंथन करना होगा कि आखिर उनका राजनीतिक स्तर किस ओर जा रहा है इस कड़ी में समाज के सभी वर्ग को अपने अहम को त्याग कर एक साथ मिलना होगा और विचार करना होगा ।
युगो से ब्राह्मण समाज ने सभी जाति और वर्ग का नेतृत्व किया है और समाज को नई दिशा प्रदान की है सनातन धर्म की रक्षा में भी ऋषि दधीचि से लेकर चाणक्य और राजनीति में अटल बिहारी वाजपेई तक ब्राह्मण जाति ने बहुत कुछ समाज को बहुत कुछ दिया है।
हर्षवर्धन शर्मा (मार्मिक धारा)