अजमेर, इन दिनों बॉलीवुड में “अजमेर 92” फिल्म चर्चा में है। यह सत्य घटना पर आधारित है। यह जो घटना है यह अजमेर में 1992 में घटित हुई थी। जिसका मुख्य आरोपी अजमेर दरगाह का चिश्ती था। इसलिए अजमेर दरगाह कमेटी इस पर सवाल उठा रही है। आइए जानते हैं वास्तव में ही घटना क्या थी?
यह घटना 1992 की थी जिसे देश का सबसे बड़ा ब्लैकमेलिंग कांड कहते हैं। इसमें कई लड़कियों के साथ बलात्कार एवं दरिंदगी की गई थी। जिसके परिणाम स्वरूप कई लड़कियों ने आत्महत्या कर लिया। तथा कई लड़कियां तथा उनके परिजन गुमनामी के जीवन जी रहे हैं। लेकिन रोचक बात यह है कि आरोपियों के खिलाफ कोई भी कार्यवाही नहीं की गई। सभी आरोपी बड़ी आसानी से छूट कर आराम की जिंदगी जी रहे हैं। कई आरोपी आज भी फरार हैं। उस समय सरकार एवं प्रशासन में इतने बड़े कांड में कोई कार्यवाही नहीं की।इस घटना पर जरा गौर करते हैं। और दरगाह को क्यों आपत्ति है इस पर भी जरा विचार करते हैं।
अजमेर में 1992 में जब यह घटना घटित हुई थी। उसके बाद लोगों में इतनी दहशत हो गई थी कि लड़के लड़कियों के जब शादी संबंध होते थे। तो पूछा जाता था कि लड़की अजमेर से तो नहीं है।
प्रशासन ने इस घटना को पूर्ण रूप से दबाने की भरपूर प्रयास किया। तथा वह सफल भी हो गए। जिसका परिणाम यह है कि इतना बड़ा ब्लैकमेल कांड आज हमारे देश के लोगों को पता ही नहीं है। इस मूवी के द्वारा इस कांड को बताने की कोशिश की गई है। इतिहास का सबसे बड़ा ब्लैकमेल कांड था। यह घटना जब 1992 में हुई थी। तो एक लड़का एक फोटो ग्राफ की दुकान पर जल्दी से फोटो दिलवाने के लिए आया था। वही बैठे एक पत्रकार को उसके जल्दबाजी करने के कारण दुकानदार से उसके बारे में जानकारी के लिए कि वह कौन सी फोटो धुलवाने आया है। पत्रकार को इस घटना के बारे में जब मालूम हुआ। तो उसने अपने अखबार में निकलवाने से पहले प्रशासन को सूचित किया। प्रशासन की ओर से कोई भी एक्शन लेने में तत्परता नहीं दिखाई गई। उसने अपने अखबार में इस घटना के बारे में बताया। लेकिन तब भी प्रशासन ने कोई एक्शन नहीं लिया। तो उसने तत्कालीन नवज्योति के एडिटर से पूछा प्रशासन कोई भी एक्शन नहीं ले रहा है। नवज्योति के एडिटर ने पुनी तस्वीरों को छापने के लिए आदेश दे दिया। उसके बाद सीआईडी जांच की गई तथा सारी घटना सामने आए। सूत्रों के अनुसार प्रथम जो एक घटना हुई।
दरगाह के मुख्य चिश्ती अनवर चिश्ती (तत्कालीन यूथ कांग्रेस का ज्वाइंट सेक्रेट्री),जरूर चिश्ती, नसीम, फारुख चिश्ती (उस समय पर वह यूथ कांग्रेस का प्रेसिडेंट था), नफीस चिश्ती (तत्कालीन यूथ कांग्रेस का वाइस प्रेसिडेंट था), यह सभी मुख्य आरोपी थे। दरगाह के पास एक लड़की जो रोती हुई आ रही थी रास्ते में चिश्ती नामक युवकों ने उससे रोने का कारण पूछा उसने बताया कि वह फीस नहीं भर पाई है। तो उन्होंने कहा कि फीस हम भर देंगे। वे उसे पास के खेतों में ले जाकर जोर जबरदस्ती करने लगे हैं। उसके साथ बलात्कार किया। उसके फोटो खींच के लिए। और उससे कहा यदि वह दूसरी लड़की को लाएगी तभी उसे छोड़ा जाएगा। इस तरीके से ब्लैकमेल कांड की शुरुआत हुई। दो-तीन दिन बाद उसने कहा कोई लड़की इस तरीके से नहीं आएगी। उन्होंने बताया तुम केवल सामान खरीदने के लिए उसको अपने साथ में लाना और हमारी मारुति वैन में बिठा देना उसके बाद हम संभाल लेंगे। लड़की ने ऐसे ही किया। और फिर दूसरी लड़की के साथ भी उसी तरह का कांड हुआ जैसा पहले वाली के साथ हुआ। इस तरह से इस तरीके से सिलसिलेवार लड़कियों को दरिंदों ने अपने चंगुल में फंसा ना शुरू कर दिया। तथा उनके फोटो को मार्केट में बेचना शुरू कर दिया। तत्कालीन न्यूज़ एडिटर ने बताया जब यह केस चला तो हमें रात के 2:00 बजे धमकियां के आतीं थी। सभी आरोपियों को 20 साल बाद पकड़ा गया। तथा मानसिक रोगी बताकर सभी आरोपियों को छोड़ दिया गया। देश के इतने बड़े ब्लैकमेलिंग का॑ड में एक भी आरोपी पकड़ा नहीं गया। इस समय सारे आरोपी रिहा है। लेकिन जो छात्रा मर चुकी है अर्थात जिन्होंने आत्महत्या की है। उनको न्याय आज तक नहीं मिला है। और जो छात्राएं आज गुमनामी के जीवन को जी रहे हैं उनको भी न्याय नहीं मिला। क्योंकि सभी अपराधी रसूखदार थे। पार्टी विशेष से जुड़े हुए थे। दरगाह के मुख्य चिश्ती थे इसलिए कोई इनका कुछ नहीं कर सका। ऐसी विडंबना है हमारे देश की जहा रसूखदार का कुछ नहीं होता। इसलिए अजमेर दरगाह को मिर्ची लग रही है और वह इस मूवी के खिलाफ कोर्ट में जा रही है।