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भगवान का वरदान

by marmikdhara
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एक वकील साहब बहुत दिनों पर कोर्ट गए थे औऱ अपने काम से निवृत होकर कोर्ट से घर लौट रहे थे।

रास्ते में एक नदी पड़ती थी। नदी पार करने लगे तो वहाँ का दृश्य बड़ा मनोरम लगा और उन्हें जाने क्या सूझा। एक पत्थर पर बैठकर अपने पौकेट से पेन और फाइल से कागज निकालकर एक बेल लिखने लगे ।

अचानक….,
हाथ से पेन फिसला और डुबुक ….
पानी में डूब गया। वकील साहब परेशान। आज ही सुबह पूरे 10 रूपये में खरीदा था।
कातर दृष्टि से कभी इधर कभी उधर देखते, पानी में उतरने का प्रयास करते, फिर डर कर कदम खींच लेते।
एकदम नया पेन था, छोड़कर जाना भी मुनासिब न था ।

अचानक…….
पानी में एक तेज लहर उठी और साक्षात् वरुण देव सामने थे।
वकील साहब हक्के -बक्के रह गये।
कुल्हाड़ी वाली कहानी याद आ गई। 🤔🤔
वरुण देव ने कहा, ”वकील साहब , इतने परेशान क्यों हैं ?
क्या चाहिए आपको ?

वकील साहब अचकचाकर बोले, “प्रभु ! आज ही सुबह एक पेन खरीदा था ।पूरे 10 रूपये का था वह ।
देखिए ढक्कन भी मेरे हाथ में है।
यहाँ पत्थर पर बैठा बेल लिख रहा था कि अचानक पानी में गिर गया।
प्रभु बोले, ”बस इतनी सी बात ! अभी निकाल लाता हूँ ।”घबराइए मत आपकी पसीने की कमाई यूं ही नहीं बर्बाद होगी ।
प्रभु ने डुबकी लगाई और चाँदी का एक चमचमाता पेन लेकर बाहर आ गए।
बोले – ये है आपका पेन ?
वकील साहब बोले – ना प्रभु। मुझ गरीब को कहाँ ये चांदी का पेन नसीब। ये मेरा नहीं।
प्रभु बोले – कोई बात नहीं, एक डुबकी और लगाता हूँ।

डुबुक …..
इस बार प्रभु सोने का रत्न जड़ित पेन लेकर आये और बोले, “लीजिये वकील साहब अपना पेन।”
वकील साहब बोले – ”क्यों मजाक कर रहे हैं प्रभु। इतना कीमती पेन और वो भी मेरा। मैं एक वकील हूँ कोई राजनेता नहीं ।
थके हारे प्रभु ने कहा, “चिंता ना करो वकील साहब
अबकी बार फाइनल डुबकी होगी और आपकी पेन आपके पास होगी ।

डुबुक ….
बड़ी देर बाद प्रभु पानी से उपर आये तो
हाँथमें वकील साहब का वहीं था जो उन्होनें आज ही सुबह दस रुपए में खरीदा था ।
बोले – ये है क्या ?
वकील साहब चिल्लाए – हाँ यही है, यही है प्रभु ।
प्रभु ने कहा – आपकी इमानदारी ने मेरा दिल जीत लिया वकील साहब
आप सच्चे वकील हैं। आप ये तीनों पेन ले लो।

वकील साहब ख़ुशी-ख़ुशी घर को चले।
कहानी अभी बाकी है दोस्तों
वकील साहब ने घर आते ही सारी कहानी पत्नी जी को सुनाई और
चमचमाते हुए कीमती पेन भी दिखाए।

पत्नी को विश्वास नहीं हुआ और
बोली कि नहीं ऐसा हो ही नहीं सकता आप किसी के चुराकर लाये हो।

बहुत समझाने पर भी जब पत्नी ना मानी तो वकील साहब उसे घटना स्थल की ओर ले गये।
दोनों उस पत्थर पर बैठे,
वकील साहब ने बताना शुरू किया था कि कैसे-कैसे सबकुछ हुआ।
पत्नी एक-एक कड़ी को किसी शातिर पुलिसिये की तरह जोड़ रही थी और घटना स्थल की मुआयना कर रही थी कि

अचानक …
डुबुक.. !!!
पत्नी का पैर फिसला और वो गहरे पानी में समा गई। वकील साहब की आँखों के आगे तारे नाचने लगे ये क्या हुआ ! डर लगने लगा कि कहीं ससुराल वाले 304 (B) का उन पर केस ना कर दें ।
जोर -जोर से रोने लगे।

तभी अचानक ……
पानी में ऊँची ऊँची लहरें उठने लगीं। नदी का सीना चीरकर साक्षात वरुण देव प्रकट हुए।
बोले – क्या हुआ वकील साहब ? अब क्यों रो रहे हो ?
वकील साहब ने रोते हुए घटना प्रभु को सुनाई। बोले प्रभु मैं तो बर्बाद हो जाऊँगा और नाहक ही आजीवन कारावास को झेलुँगा।क्यूँकि मेरी पत्नी पानी में डूब गई है। और उसके मायके वाले दहेज हत्या के मुकदमे में मुझे बर्बाद कर देंगे।

प्रभु बोले – रोओ मत। धीरज रखो। मैं अभी आपकी पत्नी को निकाल कर लाता हूँ।
प्रभु ने डुबकी लगाईं,

और …..
थोड़ी देर में,
वो कैटरीना कैफ को लेकर प्रकट हुए।
बोले –वकील साहब
क्या यही आपकी पत्नी जी हैं ?
वकील साहब ने एक क्षण सोचा और चिल्लाए, “हाँ यही है, यही है।”

अब चिल्लाने की बारी प्रभु की थी
बोले – दुष्ट वकील ठहर अभी तुझे श्राप देता हूँ ।
वकील साहब बोले – माफ़ करें प्रभु। 🙏🙏
मेरी कोई गलती नहीं। अगर मैं इसे मना करता तो आप अगली डुबकी में रिया चक्रवर्ती को ले लाते।
मैं फिर भी मना करता तो आप मेरी पत्नी को लाते। फिर आप खुश होकर तीनों मुझे दे देते।

अब आप ही बताओ प्रभु,
इस कोरोना के कारण हम वकीलों को जीने के लाले पड़े हैं। इस कोरोना ने हम वकीलों की हालत पहले ही खराब कर रखी है ।अब मैं तीन-तीन बीबियाँ कैसे पालता?
क्षमा करें प्रभु।
इसलिये सोचा, कैटरीना ही ठीक है।

भानु प्रकाश शर्मा (मार्मिक धारा)
हर्षवर्धन शर्मा (मार्मिक धारा)

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