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वर्तमान परिदृश्य में ज्योतिष की भूमिका

by marmikdhara
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अंतरिक्ष में विद्यमान नक्षत्र-राशि इत्यादि खगोलीय पिंड पृथ्वी की न केवल भौगोलिक संरचना को ही प्रभावित करते हैं अपितु पृथ्वी पर जन्म लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में ये अपनी दशा अनुसार फल-प्रतिफल देते रहतेे हैं। प्रचलित ज्योतिष विद्याओं में भारतीय ज्योतिष शास्त्र का अस्तित्व प्राचीनतम रहा है एवं सर्व प्रसिद्ध भारतीय ज्योतिषियों के फलादेश एवं भविष्यवाणियां देश-विदेश में सत्य रूप में प्रकाशित होती रही हैं।

जैसा कि सब जानते हैं, वर्तमान में कोरोना वायरस का निरंतर बढ़ रहा संक्रमण और उसका दुष्प्रभाव पूरे विश्व में दृष्टिगोचर हो रहा है। पिछले साल 26 दिसंबर  को हुए सूर्यग्रहण के समय सूर्य, चंद्रमा, शनि, बुध, बृहस्पति एवं केतु एक साथ हो कर षष्ठग्रही योग बना रहे थे जिस कारण सूर्य ग्रहण का दुष्प्रभाव और अधिक बढ़ गया और गुरु और केतु की युति की अवस्था में अन्य पाप ग्रहों का वक्री होना या राशि बदलना या साथ बैठ जाना, इस रहस्यमय वायरस के संक्रमण में सहयोगी परिस्थितियां लेकर आया और स्थिति बिगड़ती चली गई।

हालांकि अगले साल 2021 अप्रैल तक बृहस्पति का मकर राशि से कुंभ राशि में प्रवेश और सूर्य का मेष राशि में प्रवेश इस महामारी के प्रभाव को कम कर देगा परंतु वर्तमान में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ते रहने और इससे बचने के लिए बनाए जा रहे वैक्सीन में देरी होने से आम जन-समूह में एक अनजाना डर पैदा हो गया है जिससे लोगों का आत्मबल बहुत कमजोर होता जा रहा है।
इस महामारी से डरने की बजाय हमें इससे लड़ना होगा जिसके लिए जो सरकार और आयुष मंत्रालय ने स्वास्थ्य संबंधी उपाय और निर्देश दिए हैं, उनका पालन तो हमें अवश्य करना है पर साथ ही ज्योतिष शास्त्र भी इनसे संबंधित ग्रहों की खराबी खत्म करने के लिए कुछ उपाय बताता है, जो इस प्रकार से हैं:-

  1. बहुत ही सामान्य सी बात हमें इस कोरोना काल में देखने को मिली कि इस वायरस का संक्रमण सिर्फ मनुष्यों में देखा गया परन्तु पशु-पक्षियों में इसका कुछ भी असर नहीं पड़ा अतः यह स्पष्ट है कि अगर हमें इस वायरस के संक्रमण से बचना है या अपनी आत्मरक्षा करनी है तो इन निर्दोष पशु-पक्षियों पर विशेष ध्यान देना होगा। गाय को घास खिलाना, कबूतरों को चुग्गा डालना, मछलियों को आटे की गोलियां खिलाना, चीटियों को कीड़ी नगरा देना आदि इस प्रकार के छुटपुट उपाय हमें हमारी दैनिक दिनचर्या में शामिल कर लेने चाहिए।
  2. मां दुर्गा की उपासना,दुर्गा सप्तशती का पाठ, दुर्गा चालीसा, दुर्गा स्तवन और
    ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। 

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

इस मंत्र का निरंतर जाप भी अत्यंत प्रभावी होगा।

  1. रोज सुबह तुलसी के पत्तों का सेवन करें और उसके बाद 108 बार ”ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” का जाप करें।
  2. नियमित सूर्य को जल चढ़ाएं और साथ ही
    ” ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें।
  3. विद्यार्थियों को पाठ्य पुस्तकें दान करें।
  4. शनिवार के दिन शनि महाराज को नीले रंग का अपराजिता फूल चढ़ाएं और तिल के तेल से दीपक जलाएं और साथ ही महाराज दशरथ का लिखा शनि स्त्रोत भी पढ़ें।
  5. विवाहित व्यक्तियों के लिए आवश्यक है कि वह अपने वैवाहिक जीवन में खुशियां बनाए रखने की कोशिश करें तथा अपने जीवनसाथी का अपमान ना करें।

उपरोक्त ज्योतिषीय उपाय करने से हमारा आत्मबल तो बढ़ेगा ही साथ ही शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी दृढ़ होगी। मन में प्रबल आत्मविश्वास इस विपरीत समय से लड़ने की क्षमता देगा और हमें इस अनजान भय से बचाएगा।

डॉ. नेहा शर्मा
पीएच.डी. ( ज्योतिष ), आचार्य

हर्षवर्धन शर्मा (मार्मिक धारा)

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