WHO यह व्यक्त करता है कि भारत में प्रतिवर्ष दो लाख मृत्यु सुसाइड से होती हैं। जिसमें अधिकतर जवान लोग शामिल हैं जिनकी उम्र 15 साल से 39 साल के बीच तक की है। वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेंटल हेल्थ(WFMH) ने प्रत्येक 10 अक्टूबर को वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे मनाया जाता है। यह 1992 से मनाया जा रहा है। WFMH संसार में फैल रहे तनाव से उत्पन्न सुसाइड मामलों में जागरूकता फैलाने का कार्य कर रहा है।
इस साल का थीम है।”मानसिक स्वास्थ्य को अच्छा करना तथा खुदकुशी को रोकना”WHO”के अनुसार विश्व में कुल 8लाख लोग प्रतिवर्ष सुसाइड करते हैं जिसमें एक चौथाई आत्महत्या भारत में की जाती है।
यदि आप मानसिक स्वास्थ्य की तरफ जागरूक नहीं रहेंगे तो अल्जाइमर नामक बीमारी फैलने की आशंका बनी रहती है। भारत में अल्जाइमर बीमारी भी बड़ी तेजी से फैल रही है। यह भी मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित है। पूरे भारत की जनसंख्या 1 करोड़ 36 लाख है जिसमें 6000 साइकोलिस्ट डॉक्टर हैं। भारत में अनुपात बहुत ही कम है। मानसिक स्वास्थता किसी भी देश का वास्तविक विकास होता है।WHMF समय-समय पर स्कूलों व कॉलेजों में विभिन्न कार्यक्रम करते हैं। यदि आपका अच्छा मानसिक स्वास्थ्य है तो खुदखुशी पर अपने आप रोक लग जाएगी।
हाइपरटेंशन 1980 में तेजी से बढ़ना शुरू हुआ था। जब शहरी इलाकों में 20% से 40% बढ़ा तथा ग्रामीण इलाकों में 12% से 17% बढ़ा। तनाव के कारण आर्थिक नहीं होता। आर्थिक दुख दुनिया का सबसे छोटा दुख होता है। मित्रों, जीवन को खुशहाल बनाने के लिए सामाजिक जीवन का विशेष महत्व है साथ साथ आध्यात्मिक तक का भी विशेष महत्व है। हाइपरटेंशन 1980 से शुरू हुआ। वह भी शहरी क्षेत्रों में बढ़ा। लेकिन आज यह ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़ रहा है।
क्या 1980 से पहले गरीबी नहीं थी ? जबकि 1980 से पहले ज्यादा गरीबी थी। लेकिन लोगों का जीवन अत्यधिक सामाजिक था। आज आर्थिक पक्ष मजबूत है तो सामाजिक जीवन समाप्त हो गया है। सनातन धर्म सर्वश्रेष्ठ है। इस धर्म की शिक्षा से ही जीवन खुशहाल हो सकता है। बचपन में हमें अपनों से बड़ों को आगे होकर”राम राम”कहना सिखाया जाता था। बड़े लोग हमसे कुछ भी कहते थे तो छोटे बुरा नहीं मानते थे सभी से अच्छा व्यवहार करना सिखाया जाता था। घर में माता-पिता का जीवन बड़ा संतुलित होता था। कमधन में भी अच्छा जीवन जिया जाता था। आसपास के लोगों से हमारे संबंध भी अच्छे होते थे। लेकिन आज ऐसा नहीं है। हमारी संस्कृति को नष्ट किया जा रहा है। टीवी निरंतर हमारी संस्कृति को समाप्त कर रहा है। टीवी में गुंडों को नायक बनाया जाता है, लोगों को मारना पीटना, गोली मारना अच्छा बताया जाता है। हिंसा को सर्वश्रेष्ठ मानते हैं। अश्लीलता भी टीवी की देन है। यह इस तरह दिखाई जाती है जो भी हमारे मस्तिष्क पर गलत छाप छोड़ती है। इस टीवी की दुनिया ने हमें सब कुछ गलत प्रदान किया है। जो कुछ बचा वह इंटरनेट ने पूरा कर दिया। इंटरनेट ज्ञान बढ़ाने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है। यदि इसका सही उपयोग किया जाए। यह सभी नकारात्मक चीजें समाज के लिए खतरनाक हैं। नकारात्मक चीजें हमारे मस्तिष्क को ख़राब करती हैं। पाठकों, हमने बचपन से डीडी चैनल देखा और टीवी नाम मात्र का देखा और आज भी नहीं देखते हैं तथा अपने बच्चों को भी टीवी नहीं देखने देते हैं। किताब हमारी सबसे अच्छी दोस्त होती हैं। किताबों का ज्ञान जीवन में आगे बढ़ने में सहायक होता है। किताबों का ज्ञान मानसिक स्थिति को स्वस्थ रखता है तथा एक दोस्त की तरह हमारे जीवन के प्रत्येक कार्य में सहायक रहता है। जिससे हमारा आर्थिक स्तर बढ़ता है।
रामायण में राम के चरित्र को टीवी या फिल्म का कोई पात्र प्राप्त नहीं कर सकता। राम के चरित्र का अनुसरण करें। टीवी व फिल्मों में रावण के चरित्र को अच्छा बताया जाता है। यदि हम राम के चरित्र का अनुसरण करेंगे तो हमारा जीवन अपने आप सर्वश्रेष्ठ हो जाएगा। हम मानसिक रूप से स्वस्थ हो जाएंगे।मर्यादा पुरुषोत्तम राम का अनुसरण करेंगे तो व्यवहार अपने आप सुधर जाएगा। व्यवहार में अपना चाल चलन आता है तथा आर्थिक लेनदेन भी आता है। इन दोनों को सर्वश्रेष्ठ करने पर आपका जीवन अपने आप अच्छा हो जाएगा और तनाव आपसे दूर भाग जाएगा।
तनाव दूर करने का तरीका अपनी दिनचर्या को संतुलित करिए। अपने आप को व्यस्त रखिए तथा मस्त रहिए। कुछ समय अपने स्वास्थ्य तथा अपने लिए भी निकालिए। स्वास्थ्य है तो सब कुछ है। स्वास्थ्य नहीं तो कुछ नहीं। ज्यादा से ज्यादा खुश रहने की कोशिश कीजिए। तनाव दूर से ही भाग जाएगा। जीवन जीने का यही सही तरीका है।
वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेंटल हेल्थ (WFMH) भी यही कहता है जो हमने आपको बताने की कोशिश की है। यह मुश्किल नहीं है। बस कोशिश करनी है। हमने अपने जीवन में सीखा है कि कोशिशें कभी भी खराब नहीं जाती है।
हर्षवर्धन शर्मा (मार्मिक धारा)