पिछले 2 दिन से बंद शराब की दुकानों के खुलने का इंतजार कर रहे लोगों को सोमवार को भी झटका लगा। शराब ठेका संचालकों ने राज्य सरकार की नई कोरोना गाइडलाइन का विरोध करते हुए सोमवार को भी दुकानें नहीं खोली। इससे शराब लेने के लिए सुबह-सुबह दुकानों पर पहुंचे लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा। हालांकि, दूसरी तरफ ठेकेदारों का कहना है कि सरकार ने शराब की दुकानों के खुलने का जो समय सुबह 6 से 11 बजे तक निर्धारित किया है। उस समय शराब की बिक्री होती ही नहीं है। सुबह-सुबह शराब लेने के लिए कौन आएगा। ऊपर से ठेकेदारों को दुकान खोलने पर अपने टारगेट के मुताबिक सरकार को रेवेन्यू भी देना पड़ेगा।
बता दे कि सरकार ने पिछले दिनों नई गाइडलाइन जारी करके शराब की दुकानों को सुबह 6 बजे से 11 बजे तक खोलने के आदेश जारी किए थे। सरकार के लिए शराब रेवेन्यू का एक बड़ा स्रोत है। सरकार के इस फैसले से शराब कारोबारी नाखुश है। राज लीकर वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष निलेश मेवाडा ने बताया कि सरकार ने जो समय दिया है उसे सरकार ने अपने रेवेन्यू को तो सेव कर लिया। लेकिन हमारे लिए समस्या खड़ी कर दी है। हमें गारंटी शर्त के तहत निर्धारित रेवेन्यू देना पड़ेगा। जबकि सुबह कुछ बिक्री नहीं होती।
मेवाड़ा ने बताया कि हम सरकार को आज पत्र भेजकर मांग करेंगे कि हमें गारंटी शर्त के तहत या तो छूट प्रदान करें। क्योंकि इस बार लाइसेंस फीस के बजाय ड्यूटी देनी पड़ेगी। यह ड्यूटी सभी टैक्स मिलाकर 50% तक है। उदाहरण के तौर पर कोई शराब का ठेका 1 करोड़ रुपए मूल्य में नीलाम हुआ है, तो संचालक को 12 महीने में इतनी राशि के मूल्य की शराब डिपो से खरीद कर बेचनी पड़ेगी। और इसकी ड्यूटी सरकार को देनी पड़ेगी। हम सरकार से मांग करेंगे कि अगर सरकार गारंटी शर्त में छूट दे तो अच्छा है, वरना सरकार लॉकडाउन तक शराब की दुकानों को बंद करने के आदेश जारी कर दे।
बता दें कि शराब की बिक्री जितनी पीने वालों के लिए अहम है, उससे ज्यादा राज्य सरकार के लिए भी अहम है। सरकार की आय के बड़े स्त्रोतों में से एक है आबकारी विभाग। सरकार को पिछले वित्त वर्ष में 9751 करोड रुपए का रेवेन्यू मिला था। और मौजूदा वित्त वर्ष 2021- 22 में सरकार ने इस विभाग से 13500 करोड रुपए रेवेन्यू जुटाने का लक्ष्य रखा है।
अजय सिंह भाटी (मार्मिक धारा)
हर्षवर्धन शर्मा (मार्मिक धारा)