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- कहां किसानों के समर्थन में आवाज बुलंद करें।
किसानों और सरकार के बीच आठवें दौर की बातचीत से पहले राहुल गांधी ने शुक्रवार को जनता से अपील की कि वह किसानों के लिए आवाज बुलंद करें।
राहुल गांधी ने हिंदी में ट्वीट किया, “शांतिपूर्ण आंदोलन लोकतंत्र का एक अभिन्न हिस्सा होता है। हमारे किसान बहन -भाई जो आंदोलन कर रहे हैं। उसे देश भर से समर्थन मिल रहा है आप भी उनके समर्थन में अपनी आवाज जोड़कर इस संघर्ष को बुलंद कीजिए, ताकि कृषि विरोध कानून खत्म हो सके”।
एक और ट्वीट में राहुल गांधी ने कहा “मोदी सरकार ने अपने पूंजीपति मित्रों के फायदे के लिए देश में अन्नदाता के साथ विश्वासघात किया है। आंदोलन के माध्यम से किसान अपनी बात कह चुके हैं। अन्नदाता ओं की आवाज उठाना और उनकी मांगों का समर्थन करना हम सब का कर्तव्य है।”
राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने भी हिंदी में ट्वीट किया और “कहा केंद्र सरकार के कृषि विरोधी काले कानूनों के तानाशाही निर्णय से अपने अधिकारों, खेती – किसानी को बचाने की लड़ाई लड़ रहे किसान भाइयों की आवाज को बुलंद करना हमारा नैतिक दायित्व है। ताकि अड़ियल अहंकारी व असंवेदनशील भाजपा सरकार तक उनकी मांगे पहुंचे।”
सरकार और किसान नेताओं के बीच अब तक की बातचीत अनिर्णायक रही है। और दिल्ली की सीमाओं पर पिछले 44 दिनों से किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। बता दें कि किसानों की सरकार के साथ नौवें दौर की मीटिंग विज्ञान भवन में चल रही है। सरकार की तरफ से बातचीत में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्यमंत्री सोमप्रकाश मौजूद हैं। किसानों का स्टैंड इस बार भी साफ है। उनका कहना है कि तीनों कृषि कानून रद्द हो और एमएसपी पर अलग कानून बने। कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा है कि जब कानूनों में हर क्लाॅज पर बात होगी, तो समाधान निकलेगा। सरकार कानूनों में बदलाव के लिए तैयार है। हमें नतीजा निकलने की उम्मीद है। इस पर किसानों ने कहा कि क्लाॅज वाइज बात करने की कोई गुंजाइश नहीं है। आज की मीटिंग में सरकार को कानून वापस लेने की बात करनी चाहिए।
अजय सिंह भाटी (मार्मिक धारा)
हर्षवर्धन शर्मा (मार्मिक धारा)