बच्चे रोजाना 8 से 10 घंटे गैजेट्स पर बिता रहे हैं। जिससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। इससे उनकी नींद पूरी नहीं हो पा रही है। बच्चे हिंसक स्वभाव के होते जा रहे हैं।
“नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिसर्च में भी हुई पुष्टि:-“
2 से 5 साल की उम्र वाले ऐसे बच्चे थे, जिन्होंने अभी स्कूल जाना शुरु नहीं किया। वे बच्चे गैजेट्स पर ज्यादा समय बिताते हैं। इनके ब्रेन की स्कैनिंग की गई तब रिपोर्ट में सामने आया कि इनके दिमाग के ग्रे मैटर में नकारात्मक बदलाव दिखा। बच्चों का यह ग्रे मैटर बच्चों की सीखने की स्किल्स के लिए जिम्मेदार होता है।
“गैजेट से होने वाला नुकसान:-“
“मोटापे की समस्या:-“
दिन भर कई घंटे एक जगह पर बैठकर गैजेट्स का इस्तेमाल करते रहने से फिजिकल एक्टिविटी घटती जा रही है। लगातार ऐसा होते रहने पर बच्चे ओवरवेट हो सकते हैं। इसलिए उनकी फिजिकल एक्टिविटी पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
“पढ़ाई में पिछड़ रहे हैं:-“
गैजेट्स के कारण बच्चों का ध्यान बट रहा है। पढ़ाई से जुड़ी छोटी से छोटी चीजें समझने में और याद रखने में दिक्कतें आ रही हैं। बच्चे पढ़ाई में लगातार पिछड़ रहे हैं। पढ़ाई की जगह मोबाइल गेम ने ले ली है।
“नींद पूरी नहीं हो पा रही है:-“
सोने से पहले तक टीवी देखना, गैजेट्स के इस्तेमाल होने के कारण बच्चों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है। इससे बच्चों की स्लीप साइकिल डिस्टर्ब हो रही है। इसके कारण बच्चे अनिद्रा से जूझ रहे हैं।
“बिहेवियर में आ सकता है बदलाव:-“
इससे उनके शोषण और इमोशनल बिहेवियर में बदलाव दिख सकता है। टीवी शोज, फिल्में, वीडियो गेम बच्चों को लक्ष्य से भटका रहे हैं। यह बच्चों बिहेवियर में हिंसा और आक्रामकता को बढ़ा रहे हैं। बच्चे टीवी पर देखकर अपनी बात मनवाने के लिए हिंसक तरीका अपनाते हैं।
आजकल तो यह स्थिति हो रही है कि बच्चों को गैजेट्स देने से रोकते हैं तो वे आत्महत्या जैसा खतरनाक कदम भी आसानी से उठा लेते हैं।
“लिमिटेड समय के लिए गैजेट्स दें:-“
बच्चे ज्यादा जिद करें तो 2 से 5 साल तक बच्चों को 1 घंटे से ज्यादा मोबाइल ना दें। खासकर गांव के बच्चे मोबाइल का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं। हर उम्र के बच्चों के लिए गैजेट्स के इस्तेमाल करने की लिमिट तय करने की जरूरत है।
यह भी कहा जाता है कि 21वीं सदी टेक्नोलॉजी की होगी। जहां टेक्नोलॉजी के अनेक फायदे हैं। वहीं अनेक नुकसान भी हैं। हमें टेक्नोलॉजी का प्रयोग करना चाहिए, लेकिन हमारी आने वाली पीढ़ी को भी इसके दुष्प्रभाव से बचाना चाहिए।
विकास शर्मा (मार्मिक धारा)