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दुनिया का सबसे बड़ा धन

by marmikdhara
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पाठको “जीवन जीने की कला” नामक शीर्षक के अंतर्गत की कहानी लिख रहा हूं।कहानी लिखने से पहले आप लोगों के द्वारा हमारी कहानियों की जो प्रशंसा प्राप्त हो रही है। जिससे हमारी टीम प्रोत्साहित हो रही है। उसके लिए मैं आभारी हूं। भारत में तथा भारत से बाहर ब्रिटेन, अमेरिका, सिंगापुर से भारतीयों के द्वारा हमारी कहानियों को सराहा जा रहा है। इस प्रशंसा के लिए मैं सभी का हृदय से आभारी हूं। आइए मित्रों आज एक बड़ी समस्या पर विचार करते हैं। यदि आप इस कहानी के माध्यम से इस समस्या को महसूस कर सकें। तो शायद मेरी यह कहानी सफल हो जाएगी।
पाठकों जैसा कि आप लोग जानते हैं ।कि पूरे विश्व पर कोरोनावायरस नामक महामारी ने अपने पैर जमा रखे हैं। इस समय लाखों लोगों की नौकरियां छूट गई है। लोगों का व्यापार तहस-नहस हो गया है। लोग इस समय बड़ी निराशाजनक स्थिति का सामना कर रहे हैं। चारों ओर निराशा फैली हुई है। लेकिन यह समय जल्दी ही बीत जाएगा और फिर नई आशा की किरण आएगी। सभी के जीवन में वही उमंग तथा उल्लास फिर से उत्पन्न हो जाएगा। यह समय तो कोविड-19 के कारण निराशा जनक है लेकिन इस काल से पहले बहुत से लोग अवसाद की जिंदगी जी रहे हैं।
भारत देश जोकि त्योहारों का देश कहा जाता है। इस देश में हर दिन त्यौहार होता है। त्यौहारों से जीवन में उमंग बनी रहती है। फिर भी आज के दौर में सब कुछ होने के बाद भी लोग अवसाद में अपना जीवन जी रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि विश्व में प्रतिवर्ष 8लाख लोग खुदकुशी अथवा आत्महत्या करते हैं। अकेले भारत में इस आंकड़े के एक चौथाई लोग आत्महत्या करते हैं। यानी 2लाख प्रतिवर्ष आत्महत्या करते हैं। इस समस्या के बहुत से कारण है। भारतीय संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। पाश्चात्य संस्कृति की ओर बढ़ रहे हैं। तथा पाश्चात्य संस्कृति वाले भारतीय संस्कृति को अपना रहे हैं। हमारी संस्कृति में प्रत्येक दिन त्योहार, योग, संयुक्त परिवार,सनातन धर्म के द्वारा बताई गई अच्छी आदतें होने के बावजूद विश्व के एक चौथाई लोग अकेले भारत में आत्महत्या करते हैं। इसलिए मित्रों कहता हूं विश्व में सबसे अच्छी संस्कृति है तो वह “भारतीय संस्कृति” है।
पाठकों इस कहानी में जो घटना बताई गई है वह सत्य घटना है। केवल पात्रों के नाम बदले गए हैं। मेरा बचपन का दोस्त जिसका नाम विनय शर्मा था। वह कलेक्ट्रेट में बाबू है। तथा ऑफिस समय के अलावा कोचिंग क्लास में भी पढ़ाता है।
एक दिन उसका फोन आया भरतपुर में रहता है और मैं जयपुर में रहता हूं। मैं अपने स्कूल व कोचिंग से वापस 7:00 बजे अपने घर पहुंचा। सोफे पर बैठ गया। तभी मोबाइल की घंटी बजी। (टिन टिन)
हर्षवर्धन—हेलो, कौन बोल रहा है?
विनय—अरे हर्ष ! विनय बोल रहा हूं।
हर्षवर्धन—विनय बोल रहे हो।
विनय—हां, यार कैसा है तू?
हर्षवर्धन—विनय, तूने मोबाइल नंबर बदल लिया है। यह मोबाइल नंबर मेरे पास सेव नहीं था। इसलिए पहचान नहीं सका। तू बता मैं तो ठीक हूं। तू कैसा है?
और आज इतने दिनों में मेरी याद कैसे आ गई? अक्सर मैं ही फोन करता हूं। आज तो तूने पहली बार फोन करा है।
विनय—नहीं यार, ऐसी बात नहीं है। बस समय नहीं मिलता है। लेकिन तेरी याद बहुत आती है।
हर्षवर्धन—कोई बात नहीं, बता घर पर सब ठीक हैं। बच्चे ठीक हैं।
विनय—बच्चे ठीक हैं। लेकिन यार मिसेज की तबीयत खराब है।
हर्षवर्धन—क्या हो गया?
विनय—मिसेज डिप्रेशन में है। तेरी नजर में कोई डॉक्टर हो तो प्लीज यार थोड़ा समय निकाल लेना।
हर्षवर्धन—प्लीज शब्द का प्रयोग कर रहा है। तू मेरा दोस्त है। अगर प्लीज बोलेगा तो मेरे पास समय नहीं है।
विनय—सॉरी यार, परेशान हूं। इसलिए ऐसे शब्द निकल गए।
हर्षवर्धन—आदेश कर मित्रता में आदेश चलता है। ऐसा कर शनिवार को आजा। फिर डॉक्टर को दिखाकर रविवार को मैं भरतपुर जा रहा हूं। मेरे साथ आ जाना।
विनय—नहीं यार, मुझे शनिवार को आना है।
हर्षवर्धन—कोई बात नहीं मैं शनिवार को भरतपुर आ जाऊंगा तो शनिवार को मेरे साथ ही चलना। अब तो खुश।
विनय—धन्यवाद! यार तू अब तक नहीं बदला।
हर्षवर्धन—लेकिन तू बदल गया।
विनय—क्यों?
हर्षवर्धन—क्योंकि तू बात बात पर धन्यवाद कर रहा हैं। दोस्ती में “नो सॉरी नो थैंक्यू ओन्ली आर्डर”
(यह बात बुधवार की थी शनिवार को सुबह उसका फोन आया। कि 10:00 बजे तक मैं जयपुर आ जाऊंगा। मैं 10:00 बस स्टैंड पर पहुंच गया। 10 मिनट के इंतजार के बाद विनय अपनी पत्नी के साथ बस द्वारा बस स्टैंड पहुंचा। मैंने विनय को रिसीव किया।
विनय—क्या हाल है?
हर्षवर्धन—ठीक है।
विनय की पत्नी—नमस्कार भाई साहब!
हर्षवर्धन—नमस्कार भाभी जी! आपकी तबीयत कैसी है? आप डिप्रेशन में कैसे आ गई? यह तो आधुनिक बीमारी है।
विनय की पत्नी— पता नहीं लेकिन मैं बहुत परेशान हूं।
विनय—यार, डॉक्टर से अपॉइंटमेंट ले लिया क्या? डॉक्टर कैसा हैं?
हर्षवर्धन—-जयपुर का नामी डॉक्टर है। राजस्थान व राजस्थान के बाहर के लोग भी इस डॉक्टर को दिखाने आते हैं। डॉक्टर से अपॉइंटमेंट ले लिया है हमारा नंबर 35 है। 8:00 से 1:00 तक डॉक्टर देखता है। अब 10:35 हो चुके हैं। शायद हमारा नंबर आने वाला है। इसलिए अब डॉक्टर को दिखाने चलना चाहिए।
(15 मिनट में अपनी कार से विनय व उसकी पत्नी तथा मैं डॉक्टर के पास पहुंचे। वहां देखा बहुत बड़ी लाइन थी। क्योंकि डॉक्टर साहब 30 मिनट लेट आए थे। इसलिए हमें 15 मिनट इंतजार करना पड़ा। इस दौरान विनय की पत्नी को कुर्सी पर बिठा कर हम दोनों बाहर आ गए। मैंने अपने मित्र विनय से पूछा)
हर्षवर्धन—विनय भाभी जी को डिप्रेशन किस बात का है?
विनय—यार मैं सरकारी नौकरी करता हूं। बाकी समय में कोचिंग क्लास में पढ़ाता हूं। ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाने की कोशिश करता हूं। फिर भी यह पैसे के लिए चिंतित रहती हैं।
हर्षवर्धन—कोई बात नहीं सब ठीक हो जाएगा।
(तभी हमारा नंबर आ गया हमने डॉक्टर को दिखाया डॉक्टर ने विनय से कहा–“आप इनका ध्यान रखना है” इस प्रकार डॉक्टर की दवाई हमने दवा की दुकान से ली। तथा हम भरतपुर की ओर चल दिए। भरतपुर में मेरे माता-पिता रहते हैं। बच्चा तथा पत्नी भी वही थी मुझे उनको लेकर आना था। मैं भी उनके साथ अपनी कार में चल दिया। मन ही मन मैंने विचार कर लिया कि मैं इस समस्या का जरूर निदान करूंगा। मैं उन दोनों को सीधे हमारे पड़ोस में रह रहे मेरे बचपन के दोस्त के घर ले गया। तभी विनय की पत्नी ने पूछा)
विनय की पत्नी—भैया जी आप कहां जा रहे हैं?
विनय—क्या रणवीर के घर जा रहे हो?
हर्षवर्धन–हां, रणवीर के घर जा रहा हूं।
विनय—रणवीर से मिली 15 साल हो गए। चलो आज रणवीर से भी मिल जाएंगे। रणवीर स्वभाव से बहुत अच्छा है। बहुत मजा आएगा।
हर्षवर्धन–(मन में) (यह बात सुनकर मुझे आश्चर्य और दुख भी हो रहा था लेकिन मैं कुछ नहीं बोला केवल चुप रहा।)(हम लोग रणवीर के घर पहुंचे हमने दरवाजा खटखटाया। रणवीर की पत्नी जिसका नाम टीना था। उसने दरवाजा खोला बोलीं)
टीना—नमस्कार हर्ष भैया जी,आज बहुत दिनों बाद आना हुआ और भाभी जी नहीं आई क्या?
हर्षवर्धन—नमस्कार, मिसेज घर पर है। मैं अभी जयपुर से आया हूं। मिसेज भरतपुर में ही थी। यह मेरा व रणवीर का मित्र विनय हैं। यह विनय की मिसेज है।

टीना—नमस्कार जी! आइए अंदर आइए। आप लोग बैठे।
विनय—भाभी जी हम तो बैठ जाएंगे पहले आप यह बताइए रणवीर कहां है?
(यह सुनते ही टीना फूट-फूट कर रोने लग जाती हैं। विनय की पत्नि उसे संभालती है। )
विनय—(बड़े आश्चर्य के साथ कहता है) यदि आपको कुछ बुरा लगा हो तो मुझे माफ कर देना।
हर्षवर्धन—विनय रणवीर को मरे हुए 2 साल हो चुके हैं।
विनय—-(बड़े आश्चर्य के साथ कहता है) वह तो बहुत हेल्दी था फिर उसके साथ ऐसा कैसे हुआ?
टीना—यह मामला उसके शरीर से नहीं था। रणवीर व मैंने एमएससी दोनों ने एक साथ की। वही मेरी मुलाकात रणवीर से हुई। रणवीर एमएससी के साथ-साथ आईएएस के इंटरव्यू की तैयारी कर रहा था। मेरी व उसकी दोस्ती हो गई। मैं बहुत महत्वकांक्षी थी। तथा मैं अपने नाना नानी के लाड प्यार में बड़ी हुई थी। मेरे नाना नानी मेरी हर इच्छा व मेरी हर जिद को पूरा कर देते थे। मैंने सोचा रणवीर आईएएस के इंटरव्यू की तैयारी कर रहा है यदि वह आईएएस बन जाएगा तो शायद मेरी सारी ख्वाहिशें पूरी हो जाएंगी। मैंने रणवीर से शादी का प्रस्ताव रखा। रणवीर ने अपने माता-पिता से सहमति लेकर मुझसे कहा–“यदि तुम अपने माता पिता को मेरे घर भेजो फिर बड़ों की स्वीकृति के बाद मैं भी राजी हो जाऊंगा।”मैंने कहा—मेरे माता-पिता नहीं है। नाना नानी है।”उसने कहा कोई बात नहीं नाना नानी को बुला लो। मैंने अपने नाना नानी को बताया कि रणवीर आईएएस की तैयारी कर रहा है। वह आईएस बन जाएगा। शायद आईएएस बनने के बाद शादी ना करें इसलिए हमें शादी की तैयारी जल्दी करनी चाहिए। मुझे लड़का पसंद है।मेरी बात सुनकर मेरे नाना नानी ने शादी की जल्दबाजी कर मात्र 1 महीने में शादी करवा दी। शादी के तुरंत बाद रणवीर ने शिक्षक की परीक्षा दी थी। उसका परिणाम आया और वह द्वितीय श्रेणी शिक्षक में सफल हो गया। लगभग 2 महीने बाद रणवीर का आईएस का परिणाम आया जिसमें वह अनुत्तीर्ण हो गया। वह बहुत दुखी था। मैंने उससे बहुत बुरा भला कहा। मुझे लगा कि मेरे सारे सपने टूट गए। मैंने उससे बोलना कम कर दिया। मैं उससे नाराज रहती थी। वह शिक्षक में सफल हो चुका था तो विद्यालय समय के अतिरिक्त सुबह शाम वह कोचिंगो में पढ़ाता था । तथा मेरी सारी ख्वाहिशो को पूरी करने की कोशिश करता था। मैं फिजूल खर्च ज्यादा से ज्यादा करने लगे। यदि पैसे में कमी होती तो मैं उससे नाराज होती। लेकिन उसने कभी कोई नाराजगी नहीं जताई और मुझे खुश रखने की कोशिश की। उसने मुझसे कॉलेज से जो मित्रता की वह आखरी सांस तक निभाई। लेकिन मेरी मित्रता स्वार्थ पर टिकी थी। इसलिए उसका टूटना निश्चित है। एक दिन मैंने उससे “सोने के हार” की मांग रखी उसने कहा–“वह अगले महीने बनवा देगा।” मेरी इच्छाओं को पूरी करते करते उसपर बहुत अधिक कर्जा हो चुका था लेकिन वह दिन रात चुका रहा था । “सोने के हार”के लिए उसके पास पैसा नहीं था। लेकिन फिर भी उसनेअगले महीने का वादा किया। लेकिन मैं जिद पर अड़ गई। मैंने 2 दिन खाना नहीं खाया। मैंने उससे बहुत बुरा भला कहा। इस घटना के दूसरे दिन वह घर पर लेट आया मैं जब तक सो चुकी थी। सुबह 4:00 बजे मैं पानी पीने उठी। तो मैंने देखा कि वह पंखे से लटका हुआ था। पास में ही एक पत्र पड़ा हुआ था। मैं खुदखुशी अपनी मर्जी से कर रहा हूं। मैं अपनी मित्रता निभा नहीं पाया। तुम्हें खुश नहीं रख पाया। जब मैंने तुमसे शादी की तो मैंने सोचा कि मैं तुम्हें जिंदगी भर खुश रखूंगा। आईएएस के परिणाम के बाद मैंने सोचा कि मैं तुम्हें दुनिया की हर चीज प्राप्त कर आऊंगा। लेकिन मैं अपने कार्य में असफल रहा । मुझे माफ कर देना यह पत्र अपने पास रख लेना। नीचे अलमारी में कुछ रखा है उसे देख लेना। (जैसे ही मैंने अलमारी खोली तो उसमें सोने का हार था। उसको देख मुझे मेरी मूर्खता पर रोना आया। लेकिन जब तक बहुत देर हो चुकी थी। मेरी मित्रता एक स्वार्थवश थी। जो केवल पाना ही चाहती थी। पति पत्नी के संबंध में त्याग की बहुत अधिक आवश्यकता है तथा मित्रता में भी त्याग के बिना कुछ नहीं है। इन भौतिक चीजों के कारण मैंने अपने सुखों में आग लगा दी। मैं हार गई। वह इस दुनिया से जा कर भी जीत गया।
आज मुझे दुनिया की अच्छी से अच्छी चीज भी नहीं भाती है। मैं हार गई। (वह रोने लगी। हमने कुछ दिलासा दी तथा मैं विनय को उसके घर छोड़ने कार में बैठकर चल दिए। रास्ते में विनय की पत्नी बुरी तरह रोने लगी। हमने उनसे जब रोने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा-)
विनय की पत्नी—मैं भी टीना की तरह गलती करने जा रही थी। लेकिन अब मेरी आंखें खुल गई हैं। वास्तव में जीवन की खुशी इन सोने चांदी की चीजों में नहीं है। मैं भी अपने जीवन में खुश रहने की कोशिश करूंगी। तथा आप से कोई शिकायत नहीं करूंगी। भैया आपने अच्छा करा जो मुझे आज टीना से मिला दिया। मेरी सारी परेशानी समाप्त हो गई। अब मैं खुश हूं। मुझे कोई डिप्रेशन नहीं है।
(कार से उतर कर भाभी अपने घर के अंदर चली गई विनय ने मुझसे कहा)
विनय—-हर्ष घर के अंदर चलो।
हर्षवर्धन—नहीं यार, आज बहुत देर हो चुकी है। अब एक बार घर पहुंच जाने दे।
विनय—अब तो भरतपुर में ही है। 5 मिनट में घर पहुंच जाएगा ।चाय पी जा ।
हर्षवर्धन—नहीं यार आज जिद मत कर।
विनय—एक बात कहना चाहता हूं। कि मैं डॉक्टर को दिखाने जरूर जयपुर गया। लेकिन इलाज टीना भाभी के शब्दों से हुआ। तेरे कारण ऐसा हुआ इसलिए तुझको धन्यवाद।
हर्षवर्धन—भाभी जी की बीमारी मैं समझ गया और मुझे लगा इसका इलाज ऐसे ही हो सकता है। फिर धन्यवाद कह रहा है अब तेरा इलाज बाकी है। (इस प्रकार हंसते हुए मैं अपने घर चल दिया)
हर्षवर्धन शर्मा (मार्मिक धारा)

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