14 मई, भरतपुर, भरतपुर प्रशासन सारे सरकारी उपकरण, दवाइयां, इंजेक्शन सब जिंदल हॉस्पिटल को दे रहा है। जिंदल हॉस्पिटल जनता को लूट रहा है। जब सब सरकारी है तो पैसे किस बात के लिए जा रहे हैं? कोरोना काल में जीवन रक्षक माने जा रहे रेमडिविसिर इंजेक्शन की निजी अस्पताल मांग तो लगातार कर रहे हैं। लेकिन निजी अस्पतालों में इन्हें कौन सा फिजीशियन लिख रहा है? सूत्रों का दावा है कि निजी अस्पतालों में फिजीशियन का अकाल है। ऐसे मैं यहां भर्ती मरीजों का इलाज किस विशेषज्ञ की देखरेख में कौन कर रहा है? इसे जांचने का कष्ट चिकित्सा विभाग नहीं उठा सका।
भरतपुर शहर की जनरल हॉस्पिटल ने सरकारी दरियादिली का खूब फायदा उठाया है। जिंदल हॉस्पिटल पहले सरकारी वेंटिलेटर जुटाने में अव्वल रहा तो रेमडिविसिर इंजेक्शन लेने में भी सरकारी स्तर पर उस पर मेहरबानी बरस रही है। आलम यह है कि अकेले जिंदल हॉस्पिटल को आरबीएम अस्पताल से 60 रेमडिविसिर इंजेक्शन दिए गए हैं, जो भरतपुर शहर के अन्य सभी निजी अस्पतालों से बहुत ज्यादा है। वही दूसरे निजी अस्पतालों को 20 से ज्यादा इंजेक्शन नहीं मिले हैं।
जिंदल हॉस्पिटल को जिला कलेक्टर की मौखिक स्वीकृति पर वेंटिलेटर दिए गए थे, अब उसी के हर दिन नए मामले सामने आ रहे हैं। शुक्रवार को दो और मामले सामने आए। ऐसे में अपना नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि पहले वेंटिलेटर का किराया कुछ बताया और मरीज की मौत के बाद कुछ वसूला गया। अब ऐसे मरीजों के परिजन भी हाईकोर्ट में दायर याचिका में साथ होने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अगर किसी मरीज के परिजन का नाम सामने आ जाता है तो खुद प्रशासनिक अधिकारी, राजनेता व हॉस्पिटल संचालक के खास लोग दबाव डालकर चुप करा रहे हैं। इसलिए अब वह नाम उजागर किए बगैर ही कार्रवाई करेंगे। क्योंकि जिला प्रशासन को शिकायत करने का कोई मतलब ही नहीं है। जिला प्रशासन ही इस लूट में सबसे बड़ा सहयोगी है। यह जगजाहिर हो चुका है कि जब वेंटिलेटर देने के बाद खुद जिला कलेक्टर ही बार-बार बयान बदल रहे हैं। अचानक मंगलवार को आए राज्य सरकार के आदेश को अपनी पहल बता रहे हैं। (जिस आदेश में यह कहा गया कि निजी अस्पताल को संसाधन उपलब्ध कराएं लेकिन अत्यधिक शुल्क नहीं लिया जाए) लेकिन आदेश से पहले ही सारा खेल हो चुका था। यह आदेश केवल बचाव का रास्ता है। मतलब साफ है कि इसमें राजनेताओं की मिलीभगत भी शामिल है। जिला प्रशासन को भी न्याय प्रक्रिया के तहत पार्टी बनाकर जवाब मांगना चाहिए। सबसे बड़ी खामी और झूठ खुद जिला प्रशासन ने ही कहा है।
वहीं दूसरी तरफ भरतपुर जिले के दूसरे (गृह रक्षा एवं नागरिक सुरक्षा) राज्यमंत्री भजन लाल जाटव ने जिले के सभी भामाशाह से अपील की है। कि वे इस आपदा की घड़ी में दिल खोलकर राज्य सरकार का सहयोग करें। लेकिन पहले प्रशासन का तो कुछ करें।
हर्षवर्धन शर्मा (मार्मिक धारा)