Home News गरीबों का हक निजी अस्पताल के हाथ

गरीबों का हक निजी अस्पताल के हाथ

by marmikdhara
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भरतपुर, भरतपुर संभाग का सबसे बड़ा हॉस्पिटल आरबीएम अस्पताल में करोना से जिंदगियों को बचाने में असफल हो रहा है। व्यवस्थाएं पहले से ही चरमराई हुई है। यह हालत संभाग के सबसे बड़े हॉस्पिटल की है। जो कि चिकित्सा मंत्री सुभाष गर्ग का विधानसभा क्षेत्र है। दूसरी तरफ प्रशासन व्यवस्थाओं को समाप्त करने पर उतारू है। मरीजों की उखडती सांसो को सहज करने के लिए वेंटिलेटर की कमी अखर रही है। वही पीएम रिलीफ फंड से मिले सरकारी वेंटीलेटरो से निजी अस्पताल में इलाज हो रहा है। यह सारा खेल जिले के दो मंत्रियों की नाक के नीचे से हो रहा है।
भरतपुर शहर के एसपी मुखर्जी नगर में संचालित “जिंदल सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल” को प्रशासन के निर्देश पर पहले पांच वेंटिलेटर आरबीएम अस्पताल से पहुंचाए गए। इसके बाद शनिवार को पांच और वेंटिलेटर इस अस्पताल को दिए गए हैं। तथा निजी अस्पताल इसका उपयोग कर मनमाने दाम वसूल रहा है। प्रशासन का तर्क है कि आरबीएम में भारी भीड़ की स्थिति को देखते हुए निजी हॉस्पिटल को यह वेंटिलेटर दिए गए हैं। भले ही प्रशासन ने भीड़ का हवाला देकर वेंटिलेटर उपलब्ध कराए हैं। लेकिन निजी अस्पताल आरबीएम से पहुंचने वाले मरीजों को कोई राहत नहीं दे रहा है। उल्टे मरीजों से मनमाने दाम वसूल रहा है।
पीएम रिलीफ फंड से मिले 10 वेंटिलेटर आरबीएम ने जिंदल हॉस्पिटल पर मेहरबानी दिखाते हुए प्रदान किए हैं। सूत्रों के अनुसार निजी अस्पताल संचालक एक बैंक लेटर का 1 दिन का चार्ज करीब 35 से 38 हजार रूपए प्रति दिन वसूल रहा है। ऐसे में 10 वेंटिलेटर का प्रतिदिन का चार्ज करीब साढ़े 3लाख रोजाना होता है। सरकार की ओर से हर तबके के व्यक्ति को सहज इलाज के लिए यह वेंटिलेटर मुहैया कराए गए हैं। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है।
मीडिया कर्मियों ने जिला कलेक्टर हिमांशु गुप्ता व एडीएम सिटी केके गोयल से संपर्क किया। तो उन्होंने फोन ही नहीं उठाया।

हर्षवर्धन शर्मा (मार्मिक धारा)

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