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न्यायिक सेवा अपने आप में पूर्ण है। यदि आप न्यायिक सेवा में अपना भविष्य बनाते हैं तो इस सेवा में प्रतिष्ठा, धन व पद की गरिमा सभी चीजों की प्राप्ति हो जाती है। जो लोग न्यायिक सेवा में जाना चाहते हैं अथवा इस सेवा के प्रति जिनका आकर्षण है उन सभी छात्रों व उनके अभिभावकों के प्रश्नों के उत्तर देने की कोशिश इस आलेख में की गई है।
- इस सेवा को प्राप्त कैसे किया जाता है?
- एकेडमिक पढ़ाई में हमें कौन से विषय लेने होते हैं?
- इस परीक्षा में हमारी एकेडमी की योग्यता क्या होती है?
- इस परीक्षा को उत्तीर्ण करने के लिए हमारी क्या योग्यता होनी चाहिए?
सर्वप्रथम हम आपको बताते हैं इस परीक्षा का नाम “राजस्थान न्यायिक सेवा”(RJS) संक्षिप्त में RJS भी कहते हैं। इस परीक्षा में बैठने के लिए आपको विधि स्नातक होना बहुत जरूरी होता है। विधि स्नातक की डिग्री को एलएलबी भी कहते हैं। बिना एलएलबी के आप राजस्थान न्यायिक सेवा या किसी भी राज्य की न्यायिक सेवा में नहीं बैठ सकते हैं। विधि स्नातक दो तरीके से की जाती है। एक तरीका तो बारहवीं कक्षा के बाद 5 वर्षीय कोर्स किया जाता है जिसे हम BA.LLB भी कहते हैं। 5 वर्ष के बाद छात्र विधि स्नातक कहलाता है।
दूसरा तरीका स्नातक पूरा होने के बाद 3 वर्षीय कोर्स होता है जिसे हम एलएलबी कहते हैं। यह 3 साल का होता है।
दोनों में से किसी भी तरीके से विधि स्नातक होने के बाद आपके पास कई विकल्प खुल जाते हैं। एक तो आप अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस कर सकते हैं। आप APP यानी सरकारी वकील की परीक्षा दे सकते हैं। इसके अलावा भी बहुत सारे विकल्प हैं जिनमें आप अपना भविष्य बना सकते हैं। सबसे अच्छा विकल्प जज (न्यायिक अधिकारी) का है।
RJS की परीक्षा में छात्र से यह उम्मीद की जाती है कि उसे विधि की विशेष जानकारी होनी चाहिए तथा हिंदी वह अंग्रेजी का सामान्य ज्ञान भी होना जरूरी है। हिंदी व अंग्रेजी के नंबर भी मेरिट में जोड़ते हैं।
RJS परीक्षा तीन चरणों में होती है।
प्रारंभिक परीक्षा (प्रथम चरण)–
प्रथम चरण परीक्षा छंटनी तौर पर होती है। इस परीक्षा में 100 प्रश्न पूछे जाते हैं। जिसमें से 70 प्रश्न विधि से संबंधित होते हैं। 30 प्रश्न भाषाओं से संबंधित होते हैं जिसमें 15 प्रश्न हिंदी व 15 प्रश्न अंग्रेजी के होते हैं। प्रत्येक प्रश्न का एक अंक होता है। यानी 100 प्रश्नों के 100 अंक होते हैं। इसमें बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाते हैं। प्रारंभिक परीक्षा में एक पेपर होता है जिसमें यह सारे विषय आ जाते हैं। समयावधि 2 घंटे की होती है।
मुख्य परीक्षा (द्वितीय चरण)—
जो छात्र प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण हो जाते हैं वह मुख्य परीक्षा में बैठते हैं अर्थात इस परीक्षा को दे सकते हैं। मुख्य परीक्षा 300 अंकों की होती है। यह लिखित परीक्षा होती है। इसमें 4 पेपर होते हैं। दो पेपर लॉ से संबंधित होते हैं। दो पेपर भाषा के होते हैं जिसमें एक अंग्रेजी भाषा का दूसरा हिंदी भाषा का होता है। लॉ अथवा विधि का प्रत्येक पेपर 100 अंक का होता है। यानी दोनों पेपर 200 उनके होते हैं। तथा भाषा के पेपर 50- 50अंको के होते हैं अर्थात प्रत्येक पेपर 50 अंक का होता है।
साक्षात्कार (अंतिम चरण)
यह 35 अंक का साक्षात्कार होता है।इसमें पदों की रिक्तियों के तीन गुना विद्यार्थियों को साक्षात्कार में बुलाया जाता है। इसमें व्यक्तित्व से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं जो विद्यार्थी साक्षात्कार के उपरांत मेरिट में आता है वह चयनित हो जाता है तथा भविष्य का न्यायिक अधिकारी कहलाता है ।
इस तरह हमारी कोशिश रहेगी कि हम हर बार नई-नई कैरियर की आपको जानकारी दे सकें । इससे अभिभावकों व छात्रों को इसका लाभ मिल सके।
हर्षवर्धन शर्मा (मार्मिक धारा)