बीकानेर, बीकानेर में प्रॉपर्टी डीलर के माध्यम से करोड़ों रुपए की जमीन भोले -भाले लोगों को अवैध रूप से बेच दी गई। लेकिन अब वहां न तो यूआईटी का पट्टा मिल सकता है, और न किसी बैंक से लोन, बिजली और पानी के कनेक्शन भी नहीं हो रहे हैं। ऐसे 1-2 नहीं बल्कि पूरी 24 कॉलोनियो के सैकड़ों प्लॉट है। अब यूआईटी ने विज्ञापन जारी करके इन कॉलोनियों में किसी भी तरह का कोई प्लॉट नहीं खरीदने का विज्ञापन जारी किया है।
सर्वप्रथम नगर विकास न्यास से स्वीकृति लेनी पड़ती है।
बता दे कि किसी भी प्राइवेट कंपनी को कॉलोनी बसाने से पहले नगर विकास न्यास से भू राजस्व अधिनियम की धारा 90 ए व बी के तहत स्वीकृति लेनी पड़ती है। इसके विपरीत बड़ी संख्या में कृषि भूमि पर बिना स्वीकृति के प्लॉट काट दिए जाते हैं। सस्ती दर पर जमीन मिलने का सपना देखकर लोग इन्हें खरीद लेते हैं। खासकर मध्यम वर्ग के लोग इन्वेस्टमेंट के नाम पर यह प्लॉट खरीद तो लेते हैं लेकिन बाद में जी का जंजाल बन जाता है।
इन कॉलोनियों में ना तो बिजली- पानी की व्यवस्था सुचारू हो पाती है और न सड़कों का निर्माण होता है। सामुदायिक भवन, रोड लाइट, सीवरेज आदि की समस्या भी रहती है। कॉलोनी के संचालक इस काम के लिए चक्कर काटते रहते हैं। लेकिन प्रशासन कुछ भी नहीं करता। दरअसल 90 ए व बी के तहत स्वीकृत नहीं होने के कारण चाहकर भी यूआईटी यहां कोई काम नहीं कर सकता।
यूआईटी ने समाचार पत्रों में विज्ञापन जारी किया।
पिछले दिनों यूआईटी ने समाचार पत्रों के जरिए विज्ञापन जारी किया। इसमें 24 कॉलोनियों के नाम दिए गए थे। साथ ही यह भी बताया गया कि इन कॉलोनियों की स्थापना से पहले कोई स्वीकृति नहीं ली गई है। ऐसे में इन कॉलोनियों में भूमि खरीद से सावधान रहना चाहिए। यह भी कहा गया कि इन कॉलोनियों के पट्टे यूआईटी से जारी करवाने की बात कहकर गुमराह किया जा रहा है।
बता दे कि हर कॉलोनी में 100 से ज्यादा प्लॉट आमतौर पर होते हैं। किसी भी प्लॉट की कीमत 2 लाख रुपए से कम नहीं है। छोटे-छोटे आकार के इन प्लॉटों को यह कहते हुए बेचा जाता है कि यूआईटी से स्वीकृति के बाद तो महंगे हो जाएंगे, इसलिए अभी खरीद लें। लाइट और पानी तो सरकार को देने ही पड़ेंगे। सड़क हम बना कर देंगे। रोड लाइट लगाकर देंगे। जब सभी प्लॉट बिक जाते हैं तो यहां कोई लोगों की बात सुनने वाला नहीं होता।
अजय सिंह भाटी (मार्मिक धारा)