सौरभ सारस्वत अधिवक्ता जयपुर हाईकोर्ट।
आज से ठीक 58 वर्षों पूर्व 20 अक्टूबर 1962 को चीन के द्वारा धोखे से भारतीय सेना पर आक्रमण किया गया था। इस हमले में चीन ने अक्साई चीन सहित अरुणाचल प्रदेश के एक बड़े भूभाग पर अपना कब्जा जमा लिया, बल्कि हमारे वीर सैनिकों को भी अपने प्राण गंवाने पड़े।
चीन का भारत पर हमले की 58 वी वर्षगांठ पर भारत के वीर सैनिकों को नमन और उन्हें अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पण करते हुए भारत तिब्बत सहयोग मंच के उत्तर पश्चिम क्षेत्र संयोजक अधिवक्ता सौरभ सारस्वत ने कहा कि चीन की दीवार ही एकमात्र उसके अधिकार क्षेत्र में आती है शेष जमीन पर चीन ने कब्जा किया हुआ है। एक सुनियोजित साजिश के तहत लद्दाख का महत्वपूर्ण हिस्सा चीन ने अपने कब्जे में ले लिया। इसके अतिरिक्त सन 1959 में भारत के पड़ोसी देश तिब्बत को भी चीन ने अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया था। चीन के बढ़ते हुए कदमों को हमें आज रोकने की परम आवश्यकता है।
इस विषय को लेकर भारत तिब्बत सहयोग मंच पिछले अनेकों वर्षों से संपूर्ण भारत सहित विश्व में यह जनक्रांति छेड़े हुए हैं । मंच के अनेकों कार्यकर्ता देश के विभिन्न हिस्सों में आंदोलन कर और जन जागरण कार्यक्रम आयोजित कर चीन के खिलाफ आर्थिक बहिष्कार का बिगुल छेड़े हुए हैं। जिसके सकारात्मक परिणाम अब देखने को मिल रहे हैं।
सौरभ सारस्वत ने कहा कि तिब्बत सहित अन्य क्षेत्रों को चीन ने सुनियोजित ढंग से अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया है ।
20 अक्टूबर 1962 को चीन के द्वारा सुनियोजित ढंग से भारत की सीमा पर हमला किया गया और भारत के एक बड़े भूभाग पर कब्जा कर लिया गया। यदि तत्कालीन सरकार आवश्यक कदम उठाती तो भारत के हिस्से का क्षेत्र चीन से मुक्त हो जाता।
लेकिन सरकार के उदासीन रवैया के चलते हुए ना केवल हमारे वीर सैनिकों के अपने प्राण गंवाने पड़े बल्कि भारत से हार का सामना भी करना पड़ा।
यद्यपि आज देश की राजनीतिक स्थिति मजबूत हाथों में हैं और चीन यदि कोई गलती करता है तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे ।
हाल ही में गलवान घाटी में चीन के द्वारा भारतीय सैनिकों पर जो हमला किया गया उसका तात्कालिक जवाब देते हुए हमारे वीर सैनिकों ने ना केवल चीनी सैनिकों को बल्कि वहां की सरकार को भी हिला दिया।
भारत की सेना और यहां के नागरिक आज चीन के हिंदी चीनी भाई भाई के पुराने नारे को ना केवल पहचान चुकी है बल्कि अच्छी तरीके से चीन और वहां की सरकार के हथकंडे भी पहचान चुकी है । देश में आज चीन के विरोध में बड़ा अच्छा माहौल है। आशा हैं आने वाले दिनों में हम तिब्बत की आजादी और कैलाश मानसरोवर की मुक्ति के साथ ही अक्साई चीन सहित 1962 के कब्जे में किए गए सभी भूभाग को मुक्ति दिलवाने में कामयाब होंगे।
गौरव शर्मा (वरिष्ठ संवाददाता)
हर्षवर्धन शर्मा (मार्मिक धारा)