भरतपुर, भरतपुर के जुरहेरा कस्बे ने भगवान परशुराम की शोभायात्रा के दौरान हंगामा हो गया। सूत्रों ने बताया शोभायात्रा के संचालकों ने पूरी कोशिश की कोई विवाद ना हो। लेकिन पुलिस कांस्टेबल शाहिद ने इस घटना को अंजाम दिया। इस घटना से ब्राह्मण समाज के कुछ लोग बुरी तरह चोटिल भी हो गए।
बस स्टैंड के पास एक मेडिकल स्टोर संचालक ने शोभायात्रा में डीजे बजाने का विरोध किया। स्थानीय लोगों ने बताया मेडिकल स्टोर वाला असामाजिक तत्वों के साथ
उसके संबंध हैं। शोभा यात्रा का सामने से गुजर ना उसको नागवार गुजरा। इसलिए उसने सामने से निकलती हुई शोभायात्रा में डीजे बजाने का विरोध किया। तथा ब्राह्मण समाज के लोगों को पीटना शुरू कर दिया। जुरहेरा थाने पर तैनात कांस्टेबल शाहिद ने आग में घी डालने का काम करा तथा समुदाय विशेष के लोगों को लाठी एवं डंडे उपलब्ध कराएं। ब्राह्मण समाज के लोगों ने मेडिकल स्टोर संचालक से काफी मनुहार किया तथा डीजे को बंद कर दिया। इसके बाद भी समुदाय विशेष के लोगों ने मारपीट करना बंद नहीं किया।
ब्राह्मण समाज के लोग मौके पर ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करने लगे। सूचना मिलते ही पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे और कॉन्स्टेबल को लाइन हाजिर कर के इतिश्री कर दी। जिसमें कांस्टेबल शाहिद को मुख्य आरोपी बनाना चाहिए क्योंकि उसने लड़ाई को रुकवाने की वजह है उल्टा अपने समुदाय विशेष के लोगों को लाठी व डंडे उपलब्ध कराएं और एकतरफा मेडिकल स्टोर वाले का समर्थन किया। शाहिद को बर्खास्त करना चाहिए जिसकी वजह से केवल लाइन हाजिर कर दिया। क्योंकि पुलिस की जांच पर उंगली उठाने वाला सवाल है।
पुलिस अधिकारियों ने कॉन्स्टेबल को मात्र लाइन हाजिर करके विवाद उत्पन्न करने वाले को गिरफ्तार करने का आश्वासन देकर मामला शांत कराया। इसके बाद पुलिस सुरक्षा में शोभायात्रा निकाली गई। ब्राह्मण समाज की मांग है कि मौके पर ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी। उन्हें गिरफ्तार करना चाहिए था। कॉन्स्टेबल शाहिद को बर्खास्त करना चाहिए था। भारत जैसे देश में शाहिद जैसे लोग जो कि समाज को बांटने में सर्वोपरि रहते हैं। इस मामले में पुलिस ने कॉन्स्टेबल शाहिद के खिलाफ ना के बराबर कार्रवाई किए है।