ग्रहों के प्रभाव का अध्ययन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से किया जाता है। हालांकि ज्योतिष शास्त्र में भी ग्रहों के प्रभाव का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है। ज्योतिष शास्त्र में माना जाता है कि ग्रहों का प्रभाव व्यक्ति के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण होता है।
शुक्र ग्रह जीवन में प्रेम और सुख का प्रतीक होता है। सूर्य ग्रह मानसिक और शारीरिक शक्ति का प्रतीक होता है और बुद्धि को विकसित करने में मदद करता है। चंद्रमा ग्रह जीवन में आनंद, सुख और भोग का प्रतीक होता है। मंगल ग्रह उत्साह, ऊर्जा, साहस और अभिनय का प्रतीक होता है। गुरु ग्रह बुद्धि, ज्ञान, समृद्धि और विद्या का प्रतीक होता है। शनि ग्रह दुख, कष्ट, शोक और विपत्तियों का प्रतीक होता है। राहु और केतु ग्रह उत्तर और दक्षिण नोड को दर्शाते हैं जो बहुत सारे संदेश और उपलब्धियों के साथ आते हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, ग्रहों के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए अनेक अध्ययन हुए हैं जो दर्शाते हैं कि ग्रहों का प्रभाव हमारे जीवन पर निर्भर करता है। इसका वैज्ञानिक अनुसंधान समझौता पर नहीं होता है, लेकिन कुछ वैज्ञानिक सिद्धांत बताते हैं कि ग्रहों का आकार और उनके अभिकारक शक्ति के कारण वे पृथ्वी के उत्पादनी केंद्रों की उत्पत्ति, धरातल परिवर्तन, वातावरण और बारिश जैसी मौसम की विषय में एक प्रभाव डालते हैं। इस तरह के प्रभाव के अलावा, वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्रहों के अभिकारक शक्ति वैद्यकीय विज्ञान, रोग व उनके इलाज में भी एक अहम भूमिका निभाते हैं।
इसके अलावा, ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के प्रभाव को अनुसरण करने का कहा जाता है जो व्यक्ति के जीवन पर उनके अभिकारक शक्ति को ध्यान में रखते हुए उनकी व्यक्तिगत चारित्रिक और भावनात्मक विकास में मदद करता है। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के व व्यक्तिगत गुणों और व्यवहार पर इनका प्रभाव बताया जाता है। ज्योतिष शास्त्र में नौ ग्रह मान्य किए जाते हैं जिनमें सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बृहस्पति, शनि, शुक्र, बुध, राहु और केतु शामिल हैं।
वैदिक ज्योतिष में माना जाता है कि ग्रहों के चाल चलन से संवेदनशील वर्तमान के समस्याएं उत्पन्न होती हैं जो अनुभवकर्ता को उनसे निपटना होता है। इसके अलावा, ज्योतिष शास्त्र में उन ग्रहों के अभिकारक शक्ति को उपयोग में लेते हुए लोग अपने जीवन को स्वस्थ और समृद्ध बनाने के लिए उनके प्रभाव को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं।
इस प्रकार, ग्रहों का प्रभाव हमारे जीवन पर विभिन्न प्रकार के प्रभाव डालता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, इसे उचित वैज्ञानिक अध्ययन के माध्यम से जाँचा जा सकता है ताकि हम इस विषय पर अधिक समझ पाएं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर ग्रह अपने विशेष रूप से मानव जीवन पर अपना प्रभाव डालता है। निम्नलिखित हैं हमारे सौरमंडल में पाए जाने वाले प्रत्येक ग्रहों के ज्योतिष शास्त्र में विवरण:
- सूर्य: सूर्य हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है और यह हमारी जीवन शक्ति का स्रोत है। इसका प्रभाव व्यक्ति के आत्मविश्वास, समर्थन और स्वास्थ्य को बढ़ाता है।
- चंद्रमा: चंद्रमा अपने धार्मिक, मानसिक और भावनात्मक प्रभाव के लिए जाना जाता है। यह व्यक्ति की भावनाओं, भावनाओं और स्वास्थ्य को नियंत्रित करता है।
- मंगल: मंगल को आग और प्रेरणा का प्रतीक माना जाता है। इसका प्रभाव व्यक्ति के धैर्य, स्वाभाविक नेतृत्व, उत्साह और आगे बढ़ने की क्षमता को बढ़ाता है।
- बुध: बुध विवेक, बुद्धिमत्ता, संचार और व्यवहार का प्रतीक है। इसका प्रभाव व्यक्ति के मानसिक उद्यम, स्वास्थ्य और बुद्धि को बढ़ाता है।
- गुरु: गुरु का प्रतीगुरु का प्रतीक ज्ञान, विद्या, समझदारी, न्याय और समर्पण होता है। गुरु जीवन में एक मार्गदर्शक, उत्तेजक, संवेदनशील और शिक्षक की भूमिका निभाते हैं। गुरु का प्रतीक धर्म, आध्यात्मिकता, संस्कृति और आचार्य की भूमिका निभाते हैं।
- शुक्र: शुक्र सौंदर्य, कला, सुख और आनंद का प्रतीक है। इसका प्रभाव व्यक्ति के सम्पत्ति, भोग, समृद्धि और प्रेम को बढ़ाता है।
- शनि: शनि अपने धैर्य, कठोरता और निष्ठा के लिए जाना जाता है। इसका प्रभाव व्यक्ति के धैर्य, कार्य निष्ठा और सम्पत्ति को बढ़ाता है।
- राहु: राहु का प्रतीक कपट, चालाकी और अभिशप्त होता है। इसका प्रभाव व्यक्ति को विषयों में उत्सुकता और उत्तेजना का अनुभव करवाता है।
- केतु: केतु का प्रतीक बुराई, अनिष्ट और अभिशाप होता है। इसका प्रभाव व्यक्ति को नकारात्मक विचारों और व्यक्तिगत असफलताओं से लड़ने की क्षमता देता है।
ज्योतिष शास्त्र में प्रत्येक ग्रह की स्थिति, गतिविधि और आकृति के आधार पर व्यक्ति का भविष्यफल निर्धारित किया जाता है। इन ग्रहों के बीच आपस में संयोग और युति होने से भी व्यक्ति के जीवन में परिवर्तन आ सकते हैं।