विधिवेत्ता का परिचय
जयपुर – अधिवक्ता
भानु प्रकाश शर्मा ने अपनी वकालत की पढ़ाई राजस्थान विश्वविद्यालय की विधि शाखा से पूर्ण की और भानुप्रकाश शर्मा वकालत के शुरुआती दिनों से ही अपने पेशे को लेकर गंभीर व अनुशासित व्यक्ति रहे हैं तथा इन्होंने कई बेगुनाह व्यक्तियों को कानून के दायरे तथा उनको उनके अधिकारों से अवगत करवाकर न्याय दिलाया है। राजस्थान उच्च न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालयों में लगभग 14 वर्षों से वकालत का कार्य करते आ रहे है।उनकी पहचान आपराधिक मामलों में निपुण एवं कुशल अधिवक्ता के रूप में सामने आई है | वे वर्तमान में राजस्थान लोक सेवा आयोग में भी अधिवक्ता के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं |
प्रश्न – भारत में चरस, गांजा, हीरोइन इत्यादि नशीले पदार्थों संबंधित अपराधों लिए क्या कानून है ?
उत्तर – भारत में इस संबंध में स्वापक औषधि एवं मन: प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 बना हुआ है | जिसे संक्षिप्त रूप से एन.डी.पी.एस. एक्ट के नाम से जाना जाता है | नशीले पदार्थों जैसे गांजा, हीरोइन अफीम से संबंधित अपराधों पर उक्त अधिनियम लागू होता है |
प्रश्न – क्या उक्त अधिनियम मे नशीले पदार्थों का नाम एवं विवरण बताया हुआ है ?
उत्तर – जी हां| एन.डी.पी.एस. एक्ट में नशीले पदार्थों की एक सूची दे रखी है | इसके अलावा सरकार द्वारा समय-समय पर उक्त पदार्थों को सूची में नियमानुसार परिवर्तन भी किया जा सकता है | उक्त सूची में बताए गए समस्त पदार्थ प्रतिबंधित होते हैं | जिनका सेवन किया जाना अपराध है |
प्रश्न – नशीले पदार्थों संबंधित अपराध का विचारण किस न्यायालय में किया जाता है ?
उत्तर – ऐसे अपराधों के संबंध में एन.डी.पी.एस. एक्ट, 1985 की धारा 36 के तहत विशेष न्यायालय की स्थापना का प्रावधान किया है जिनमें ऐसे मामलों का विचारण किया जाता है |
प्रश्न – क्या नशीले पदार्थ के सभी मामले ऐसे विशेष न्यायालय में चलते हैं ?
उत्तर- ऐसा नहीं है इस संबंध में अधिनियम में मादक पदार्थों की श्रेणियां बनाई है जिसके तहत विभिन्न मात्राओं के बारे में बताया गया है
यदि अपराध न्यून मात्रा के संबंध में है तो उसका विचारण मजिस्ट्रेट न्यायालय में किया जाएगा |
न्यून मात्रा से अधिक अन्य मात्रा के संबंध के सभी अपराधों का विचारण एनडीपीएस मामलों की विशेष अदालत में किया जाएगा |
प्रश्न – हाल ही में बॉलीवुड स्टारों की चैट और व्हाट्सएप में नशीले पदार्थों संबंधित बातें सामने आई है क्या यह साक्ष्य के रूप में लाई जा सकती है ?
उत्तर- व्हाट्सएप चैट इत्यादि के तौर पर साक्ष्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य कहलाती है | इस संबंध में भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत इन्हें साक्ष्य तो माना जा सकता है परंतु अधिनियम की धारा 65 (ए) एवं (बी) के समस्त प्रावधानों के तहत ही इन्हें साबित कराया जा सकता है |
प्रश्न – क्या नशीले पदार्थ का स्वयं के लिए उपयोग करना भी अपराध की श्रेणी में आता है ?
उत्तर – जी हां | अधिनियम के अनुसार यदि व्यक्ति अपने स्वयं के लिए भी नशीले पदार्थों का सेवन करेगा तो वह अपराध करेगा | इस संदर्भ में अधिनियम की धारा 27 में दंड के बारे में प्रावधान दिए गए हैं |
प्रश्न – एन.डी.पी.एस. एक्ट में अपराध साबित होने पर सजा के संबंध में क्या प्रावधान है ?
उत्तर – इस अधिनियम में मादक पदार्थों के संबंध में तीन श्रेणियां विभक्त की गई है | जिसके आधार पर अपराध के दंड के प्रावधान किए गए हैं |
यदि अपराध अल्प अर्थात न्यून मात्रा से संबंधित है तो ऐसे अपराध के संबंध में 1 वर्ष की अधिकतम सजा या जुर्माने अथवा दोनों का दंड दिया जा सकता है |
इसके अलावा यदि अपराध अल्प मात्रा से अधिक और व्यवसायिक मात्रा से कम है तो 10 वर्ष तक की सजा और ₹100000 तक का जुर्माना का प्रावधान है
और यदि अपराध व्यवसायिक मात्रा से संबंधित है तो न्यूनतम सजा 10 वर्ष और अधिकतम 20 वर्ष तक और जुर्माना एक लाख से 200000 तक दिया जा सकता है |
हर्षवर्धन शर्मा (मार्मिक धारा)