जयपुर, पुराने जमाने में कहावत थी। “पहला सुख निरोगी काया दूजा सुख घर में हो माया,” लेकिन आज के भौतिक युग में इस कहावत को उल्टा कर दिया। “पहला सुख घर में हो माया, दूजा सुख भी घर में हो माया चाहे चली जाए काया”कोविड-19 में लॉक डाउन होने के कारण बाजार में पाम ऑयल की खपत कम हो गई थी। आयात भी रुक गया था। 6 महीने से पाम ऑयल का प्रयोग नहीं हो रहा था लेकिन अब सरकार में पाम ऑयल का आयात शुरू कर दिया। भारत में अभी 3.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पाम ऑयल की खेती की जाती है , जिसे बढ़ाकर 19 लाख हेक्टेयर करने की योजना है। बाजार की खाद्य सामग्री, लिपस्टिक, सौंदर्य के सामान में भी इस पाम ऑयल का प्रयोग किया जाता है। पाम ऑयल किडनी व हृदय के लिए सबसे अधिक नुकसान पहुंचाता है। भारत में सबसे अधिक जो हृदय के रोगी बढ़ रहे हैं वह पाम ऑयल की देन है। भारत में इसका उत्पादन और बाहर से इसका आयात किया जाता है।”कब तक सरकारें लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करती रहेंगे।”यह सोचने का विषय है।
हर्षवर्धन शर्मा (मार्मिक धारा)