Home Uncategorized नवरात्रि (षष्ठम नवरात्र)

नवरात्रि (षष्ठम नवरात्र)

by marmikdhara
0 comment

मां दुर्गे की छठवें के स्वरूप को कात्यायनी के रूप में जाना जाता है । महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहाँ पुत्री के रूप में जन्म लिया था।इसलिए वे कात्यायनी कहलाती हैं।नवरात्रि के षष्ठम दिन इनकी पूजा और आराधना होती है।इनकी आराधना से भक्त का हर काम सरल एवं सुगम होता है ।चन्द्रहास नामक तलवार के प्रभाव से जिनका हाथ चमक रहा है, श्रेष्ठ सिंह जिनका वाहन है, ऐसी असुर संहारकारिणी देवी कात्यायनी कल्याण करें।

महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर उनकी इच्छानुसार उनके यहां पुत्री के रूप में पैदा हुई थी । महर्षि कात्यायन ने इनका पालन -पोषण किया तथा महर्षि कात्यायन की पुत्री और उन्हीं के द्वारा सर्वप्रथम पूजे जाने के कारण देवी दुर्गा को कात्यायनी कहा गया ।देवी कात्यायनी अमोद्य फलदायिनी है, इनकी पूजा-अर्चना द्वारा सभी संकटों का नाश होता है ।माँ कात्यायनी दानवों तथा पापियों का नाश करने वाली है । देवी कात्यायनी जी के पूजन से भक्त के भीतर अद्भुत शक्ति का संचार होता है । इस दिन साधक का मन “आज्ञा चक्र ” में स्थित रहता है । योग साधना में इस आज्ञा चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है । साधक का मन आज्ञा चक्र में स्थित होने पर उसे सहज भाव से मां कात्यायनी के दर्शन प्राप्त होते हैं।साधक इस लोक में रहते हुए अलौकिक तेज से युक्त रहता है। मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत दिव्य और स्वर्ण के समान चमकीला है । यह अपनी प्रिय सवारी सिंह पर विराजमान रहती हैं । इनकी चार भुजाएं भक्तों को वरदान देती है, इनका एक हाथ अभय मुद्रा में है ,तो दूसरा हाथ वरमुद्रा में है ,अन्य हाथों में तलवार तथा कमल का फूल है।

चन्द्रहासोज्जवलकरा शार्दूलावरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्यादेवी दानव घातिनी।।

भानु प्रकाश शर्मा (मार्मिक धारा)
हर्षवर्धन शर्मा (मार्मिक धारा)

You may also like

Leave a Comment

True Facts News is renowned news Paper publisher in Jaipur, Rajasthan

Newsletter

Subscribe my Newsletter for new blog posts, tips & new photos. Let's stay updated!

Laest News

@2023 – All Right Reserved. Designed and Developed by TrueFactsNews