सुप्रीम कोर्ट ने कहां टीवी पर दिखाए जाने वाले कंटेंट की स्क्रीनिंग होनी चाहिए।
तांडव फिल्म पर चल रही कॉन्ट्रोवर्सी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि over-the-top यानी ओटीटी प्लेटफॉर्मस पर दिखाए जाने वाले कंटेंट की क्या स्क्रीनिंग होनी चाहिए?, क्योंकि कुछ प्लेटफार्म पर तो पोर्नोग्राफी भी दिखाई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सोशल मीडिया और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करने के लिए बनी गई नई गाइडलाइन सौंपने को कहा।
सुप्रीम कोर्ट अमेजन की क्रिएटिव हेड अपर्णा पुरोहित की अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रहा था। वेब सीरीज तांडव में हिंदू देवी देवताओं का अपमान होने और प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद की गरिमा से खिलवाड़ करने के आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश के तीन शहरों लखनऊ, नोएडा और शाहजहांपुर में एफ आई आर दर्ज हुई थी। लखनऊ में एफ आई आर दर्ज होने के बाद अमेजन की क्रिएटिव हेड का भी नाम इसमें आया था। इसके खिलाफ उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दी थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की। सुप्रीम कोर्ट से उन्हें आज भी जमानत नहीं मिली। इस मामले की सुनवाई शुक्रवार तक के लिए टाल दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि फिल्में देखने का ट्रेडिशनल तरीका अब पुराना हो चुका है। लोगों का इंटरनेट पर फिल्में देखना अब कॉमन है। हमारा सवाल है कि क्या इसकी स्क्रीनिंग नहीं होनी चाहिए?
इससे पहले अमेजन की क्रिएटिव हेड की तरफ से पेश वकील ने कहा कि अपर्णा पुरोहित अमेजन की एंप्लाय है। इस मामले में प्रोड्यूसर और एक्टर आरोपी है। कंपनी आरोपी नहीं है। सिर्फ पब्लिसिटी हासिल करने के लिए इस तरह के केस दायर किए जाते हैं।
अजय सिंह भाटी (मार्मिक धारा)
हर्षवर्धन शर्मा (मार्मिक धारा)