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72 साल के बुजुर्ग ने जीती अपने खिलाफ हुए अपराध की जगं-

by marmikdhara
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  • डेढ़ साल पहले 72 साल के बुजुर्ग से हुई थी 27 लाख की ठगी।
  • पिछले डेढ़ साल में पुलिस ने 30 से ज्यादा छापे मारे, फिर भी नहीं पकड़ में आया था आरोपी।
  • बेटे ने साइबर एक्सपर्ट हायर कर 4 घंटे में पकड़वाया आरोपी को।
    जयपुर के बरकत नगर निवासी 72 साल के कारोबारी नवरत्न शर्मा के साथ 2019 सितंबर में 2 बदमाशों ने प्लॉट बेचने के नाम पर 27 लाख की ठगी की। डेढ़ साल तक पुलिस ने 30 जगह दबिश दी, लेकिन फिर भी आरोपी पकड़ में नहीं आए। परिवादी के बेटे गिरिराज शर्मा ने साइबर एक्सपर्ट और प्राइवेट डिटेक्टिव की मदद से डेढ़ साल से फरार आरोपी को 4 घंटे में ही पकड़वा दिया।
    72 साल के बुजुर्ग नवरत्न शर्मा ने बजाज नगर थाने में केस दर्ज कराया था। उन्होंने तत्कालीन अधिकारी सुनील गोदारा को आरोपियों की लोकेशन से लेकर गाड़ी तक मुहैया कराई। लेकिन दबिश से कुछ देर पहले ही आरोपी अपना मोबाइल बंद कर देता और फरार हो जाता। जांच अधिकारी विश्नोई ने कहा साल 2019 में मोहन और गजेंद्र ने नवरत्न को मधुबन कॉलोनी में फर्जी दस्तावेज के जरिए 60 लाख रुपए में प्लॉट बेचा था। इसके लिए ₹27 लाख रुपए भी लिए थे। बाद में जब रजिस्ट्री के लिए कहा तो उन्होंने टालमटोल करना शुरू कर दिया। जांच की तो पता चला कि प्लॉट किसी और के नाम है। मुझे 16 दिसंबर 2020 को जांच रिपोर्ट मिली थी। इसके बाद गिरिराज ने साइबर एक्सपर्ट की मदद से आरोपी की लोकेशन दी तो 28 जनवरी को सीकर रोड स्थित रामपुरा निवासी मोहन शेखावत को गिरफ्तार कर लिया गया। हर दबिश से पहले आरोपी का मोबाइल बंद होने से गिरिराज को मिली भगत का शक हुआ। जनवरी में जांच अधिकारी का तबादला हुआ तो नए जांच अफसर प्रकाश विश्नोई के साथ मिलकर गिरिराज ने साइबर एक्सपर्ट शैलेंद्र प्रचार और एक प्राइवेट डिटेक्टिव हायर किया। प्रचार ने बताया पहले हमने आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट को ट्रेस किया। उस पर फिशिंग अटैक किया। उसके बाद इंट्रेस्ट की इमेजेज भेजी। उसके इमेज देखते ही हमारे पास उसकी लाइव लोकेशन आती गई। इसके बाद उसे ट्रेस करने के लिए कुछ प्रॉपर्टी संबंधी कुछ इमेज भेजी थी। इसमें भी उसने रुचि दिखाई। लाइव लोकेशन के आधार पर उसे ट्रेस किया गया।
    पता चला है कि आरोपी मोहन कर्नाटक नंबर की गाड़ी काम में लेता है। 28 जनवरी को लोकेशन कलेक्ट्रेट में आई तो जांच अधिकारी टीम व गिरिराज के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां उसकी गाड़ी के पास चार पुलिसकर्मी तैनात किए गए, तो लोकेशन सी- स्कीम आई। पीछा करने पर लोकेशन विद्युत नगर, अजमेर रोड, फिर बनीपार्क आई। अंत में कलेक्ट्रेट के पास उसे दबोच लिया गया।
    जुलाई 2020 में एक बार पीड़ित ने आरोपी की लोकेशन अजमेर रोड पर जयसिंह पुरा आई थी। पुलिस पहुंची तो आरोपी मल्टी स्टोरी बिल्डिंग के एग्जिट गेट पर लगे बैरिकेट्स को टक्कर मारकर भाग गया। और उसी दिन परिवादी के बेटे को फोन पर बोला “पुलिस मेरा कुछ नहीं कर सकती मेरी सबसे पहचान है।”
    इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की सजगता की पोल भी खुल गई। सारी सुविधाएं होने के बावजूद पुलिस डेढ़ साल से आरोपी को नहीं पकड़ पाई। और उन्हीं सुविधाओं का उपयोग कर परिवादी के बेटे ने आरोपी को 4 घंटे में ही पकड़वा दिया।

अजय सिंह भाटी (मार्मिक धारा)
हर्षवर्धन शर्मा (मार्मिक धारा)

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