जयपुर, देश विदेश के प्रसिद्ध न्यूरोलॉजिस्ट और पद्मश्री श्री डॉक्टर अशोक पनगढ़िया का शुक्रवार दोपहर 3:50बजे निधन हो गया। पनगढ़िया कोविड-19 से जूझ रहे थे और लंबे समय से वह वेंटिलेटर पर थे। उनकी स्थिति ज्यादा खराब होने के बाद दोपहर करीब 2:30बजे उन्हें जयपुर स्थित EHCC अस्पताल से उनके निवास पर वेंटिलेटर सपोर्ट पर ही लाया गया था। लेकिन करीब 16 घंटे बाद डॉक्टरों ने उनको मृत घोषित कर दिया। करीब 10 दिन पहले उनकी तबीयत वैक्सीन की दूसरी डोज लेने के बाद बिगड़ी थी।
डॉक्टर पनगढ़िया के फेफड़े डैमेज हो गए थे।
सूत्रों के अनुसार कोरोना के कारण पनगढ़िया के फेफड़े डैमेज हो चुके थे। 48 दिनों तक कोरोना से लड़ने के बाद आखिरकार डॉक्टर पनगढ़िया जीवन की जंग हार गए। इससे पहले उनकी स्वस्थ होने के लिए पूरे देश भर में उनके करीबी और उनसे जुड़े लोग उनके जल्दी ठीक होने की दुआएं कर रहे थे। उनके इलाज के लिए देश-विदेश के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगी हुई थी। जिसमें टॉप मोस्ट नेफ्रोलॉजिस्ट , पल्मनोलॉजिस्ट, फिजिशियन शामिल थे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इनकी तबीयत पर नजर रखे हुए थे।
25 अप्रैल को आर यू एच एस में हुए थे भर्ती।
सूत्रों के अनुसार डॉ पनगढ़िया को 24 अप्रैल को कोविड-19 लक्षण महसूस होने लगे थे। तब वेJLN मार्ग स्थित एक निजी लैब गए और वहां HRCT करवाई। सिटी स्कैन की रिपोर्ट में उनका स्कोर 17 आया था। जिसके बाद वह 25 अप्रैल को खुद जयपुर के आर यू एच एस अस्पताल में भर्ती हुए थे। बताया जा रहा है कि उनकी तबीयत खराब होने के बाद जयपुर के जवाहर सर्किल स्थित EHCC अस्पताल में शिफ्ट कर दिया था।
वैक्सीन की दूसरी डोज के बाद बिगड़ी तबीयत।
पनगढ़िया के करीबी की मानें तो उन्होंने इस बीमारी से करीब 10-12 दिन पहले को कोविशील्ड की दूसरी डोज SMS अस्पताल जाकर लगवाई थी। वैक्सीन लगने के बाद कुछ दिन बाद में कोरोना के लक्षण महसूस हुए और उन्होंने जब जांच करवाई तो करोना की पुष्टि हुई।
घर से ज्यादा बाहर नहीं निकलते थे।
बताया जा रहा है कि मैं पिछले 1 साल से घर से कहीं ज्यादा निकलते थे। पिछले साल जुलाई 2020 में उनके पुत्र की शादी के दौरान भी कार्यक्रम में 15 लोग ही शामिल हुए थे। उदयपुर में प्रस्तावित शादी समारोह को जयपुर में एक छोटे से आयोजन के तौर पर करवाया था। इसके अलावा डॉ पनगढ़िया ने पिछले 1 साल (जब से कोविड शुरू हुआ) तब से मरीजों को देखना भी बंद कर दिया था। केवल ऑनलाइन ही मरीजों को परामर्श दिया करते थे।
2014 में पद्मश्री पुरस्कार और 2002 में डॉक्टर बी सी राय अवार्ड मिला।
न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर पनगढ़िया को 1992 में राजस्थान सरकार की ओर से मेरिट अवार्ड मिला। वह SMS में न्यूरोलॉजी के विभागाध्यक्ष रहे। 2006 से 2010 तक प्रिंसिपल रहे हैं। 2002 में उन्हें मेडिकल काउंसलिंग ऑफ इंडिया ने डॉक्टर बी सी राय अवार्ड दिया। 2014 में उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया। उनके 90 से ज्यादा पेपर जर्नल में छप चुके हैं। उनकी मेडिकल और सोशल से सहभागिता के चलते उन्हें यूनेस्को अवार्ड भी मिल चुका है। उन्हें कई लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड भी प्राप्त हुए हैं।
हर्षवर्धन शर्मा (मार्मिक धारा)