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माता-पिता का ऋण।

by marmikdhara
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आज हम एक जीवन में अनोखी बात करने जा रहे हैं जो हमारे घर में संतान उत्पन्न होती है वह हमारा कर्ज होता है उसे जन्म देकर और उसका कार्य करके हर माता-पिता उस कार्य को उतारने का प्रयास करता है जो माता अपने पुत्र या पुत्री का पक्ष लेती है वही पुत्र आगे जाकर उस माता के सबसे बड़ा विरोधी बन जाता है इसी को संसार में कलयुग कहा गया है और यह ऋण तो हमें उतारना ही पड़ेगा क्योंकि इस युग में इन लोग राक्षसी जीवन ज्यादा यापन करने का प्रयास कर रहे हैं पहले लोग लगभग रात्रि में 9:00 या 10:00 बजे तक सो जाया करते थे आजकल नवयुवक पीढ़ी का जीवन नारकीय जीवन हो गया है वह 11:00 का पता नहीं 12:00 का पता नहीं कभी-कभी तो पूरी रात का भी उनको यह पता नहीं कब सुबह हो गई और सुबह 11:00 बजे 12:00 बजे उठना इससे ज्यादा क्या नारकीय जीवन होगा जो मनुष्य सूर्य उदय के बाद उड़ता है उसके सारे सरकारी कार्य अधूरे रहते हैं यह उसके भाग्य की विडंबना है* क्योंकि पुत्र अक्सर मोबाइल में लिखता है माय वाइफ इज माय लाइफ तो वह उस समय उसकी माता कहां चली जाती है उसके मन में से जिस मां ने उसे पूरी रात जाग जाग कर पाल पोस कर बड़ा किया और उसके पिता जो रात दिन मेहनत करके अपने पुत्र व पुत्री के लिए सोचता रहता है उसका भाव उसके जीवन से पूर्णतया मिटता चला जा रहा है

मयूर पंख का ऋण

वनवास के दौरान माता सीताजी को पानी की प्यास लगी, तभी श्रीरामजी ने चारों ओर देखा, तो उनको दूर-दूर तक जंगल ही जंगल दिख रहा था!
कुदरत से प्रार्थना करी हे जंगलजी !आसपास जहाँ कहीं पानी हो,वहाँ जाने का मार्ग कृपया सुझाईये, तभी वहाँ एक मयूर ने आकर श्रीरामजी से कहा कि आगे थोड़ी दूर पर एक जलाशय है. चलिए मैं आपका मार्ग पथ प्रदर्शक बनता हूँ, किंतु मार्ग में हमारी भूल चूक होने की संभावना है!!

श्रीरामजी ने पूछा ~ वह क्यों ?तब मयूर ने उत्तर दिया कि ~
मैं उड़ता हुआ जाऊंगा और आप
चलते हुए आएंगे, इसलिए मार्ग में
मैं अपना एक-एक पंख बिखेरता हुआ जाऊंगा. उस के सहारे आप
जलाशय तक पहुँच ही जाओगे.
इस बात को हम सभी जानते हैं कि मयूर के पंख, एक विशेष समय एवं
एक विशेष ऋतु में ही बिखरते हैं.
अगर वह अपनी इच्छा विरुद्ध पंखों को बिखेरेगा, तो उसकी मृत्यु हो जाती है.
और वही हुआ. अंत में जब मयूर
अपनी अंतिम सांस ले रहा होता है ,उसने मन में ही कहा कि वह कितना भाग्यशाली है, कि जो जगत की प्यास बुझाते हैं,
ऐसे प्रभु की प्यास बुझाने का उसे सौभाग्य प्राप्त हुआ!! मेरा जीवन धन्य हो गया.

अब मेरी कोई भी इच्छा शेष नहीं रही,तभी भगवान श्रीराम ने मयूर से कहा कि मेरे लिए तुमने जो मयूर पंख बिखेरकर,
मुझ पर जो ऋणानुबंध चढ़ाया है, मैं उस ऋण को अगले जन्म में जरूर चुकाऊंगा …. मेरे सिर पर धारण करके

तत्पश्चात अगले जन्म में श्री कृष्ण अवतार में उन्होंने अपने माथे पर मयूर पंख को धारण कर वचन अनुसार उस मयूर का ऋण उतारा था.

तात्पर्य यही है कि अगर भगवान को ऋण उतारने के लिए
पुनः जन्म लेना पड़ता है, तो हम तो मानव हैं न जाने हम कितने ही ऋणानुबंध से बंधे हैं,उसे उतारने के लिए हमें तो कई जन्म भी कम पड़ जाएंगे.
हर मनुष्य को उसके माता-पिता का ऋण यही चुका कर जाना पड़ता है वह किस रूप में चुकता करके जाना पड़ता है
यह उसके कर्मों के अनुसार ही उसे पता लगाना होता है इसलिए अक्सर माता पिता अपनी जन्म पत्रिका लेकर ज्योतिषियों के पास जाते हैं और पूछते हैं कि हमारे पुत्र या पुत्री सुख है या नहीं और परेशान होते रहते हैं

आचार्य धर्मेंद्र खंडेलवाल
जयपुर
फोन नंबर 75685 78595

हर्षवर्धन शर्मा (मार्मिक धारा) www.Marmikdhara.in.(Hindi)
www.Marmikdhara.com(English)

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