बांसवाड़ा, बांसवाड़ा से लगभग 14 किलोमीटर दूर रामकुंड जहां पत्थरों से पानी टपकता है। 200 फुट नीचे कुंड को भरता है यहां राम ने शिवलिंग की स्थापना की थी त्रेता युग में। यह पानी कभी नहीं सूखता है। पत्थरों में छेद भी नहीं है यह पानी कहां से आता है। यह भी कोई नहीं जानता पानी वर्षभर टपकता है। इसे रामकुंड के नाम से जाना जाता है इस कुंड को फाटी खान के नाम से भी जाना जाता है ।
पौराणिक कथा-
इस कुण्ड के पीछे एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा है कि भगवान राम वनवास के समय यहां आए थे तब वन में मां सीता को प्यास लगी वहां पानी की कोई व्यवस्था नहीं थी ।श्री राम ने तीर चला कर पहाड़ को भेद दिया पहाड़ फट गया। पत्थरों को चीरकर कुंड बन गया।
द्वापर युग से संबंध–
द्वापर युग में अज्ञातवास के दौरान भीम यहां आराम करने आए थे। तब भीम को गुफा रूपी कोटरी काफी छोटी पड़ गई। तब भीम ने अपना पैर गुफा में अड़ाया था। जिसके निशान आज तक गुफा में बने हुए हैं।
शिवलिंग निर्माण :-
कुंड में नीचे उतरने पर शिवलिंग स्थापित है। इस शिवलिंग की स्थापना भगवान राम ने रामेश्वरम से पहले की थी। इस शिवलिंग को स्वयंभू शिवलिंग भी कहा जाता है।
इस कारण पड़ा नाम फाटी खान :-
यहां पहाड़ अंदर तक फटे हुए हैं। इसमें लंबी दरारे हैं। इसलिए इसे स्थानीय भाषा में फाटी खान का जाता है। यहां सावन में काफी भीड़ हो जाती है। यह घूमने के लिए भी एक अच्छा स्थान है। यहां रोजाना सैकड़ों पर्यटक आते हैं।
जानवरों की सैरगाह:–
राम कुंड का पानी कभी सूखता नहीं है नीचे तक सीढ़ियां बनी हुई है रात में कई जंगली जानवर यहां प्यास बुझाने आते हैं जब सभी नदियां तालाब का पानी सूख जाता है जब जानवर यहां पानी पीने आते हैं क्योंकि यहां का पानी कभी नहीं सूखता है।
रहस्यों की खान:-
इस गुफा में कई अनसुलझे कई रहे हैं यहां कई पथरीली गुफाएं इसमें जंगली जीवो के भय से इन गुफाओं में जाने का कोई साहस नहीं जुटा पाता है लेकिन भीतर एक गुफाएं कई किलोमीटर तक ले जाती हैं।
विकास शर्मा (मार्मिक धारा)