पाठकों, 26 जनवरी की सभी को शुभकामनाएं देते हुए आज हम सब मिलकर अपने स्वतंत्रता सेनानियों को याद कर रहे हैं। कैसे उन्होंने अपने जीवन का बलिदान दिया? ऐसा बताते हुए कुछ स्वतंत्र सेनानियों का वर्णन कर रहा हूं।
भगत सिंह एक ऐसा नाम है जिसको किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को बंगा गांव , जिला-लायलपुर, पंजाब में हुआ यह भाग आज पाकिस्तान में आता है। भगत सिंह ने अपने कॉलेज के दिनों में नेशनल यूथ ऑर्गेनाइजेशन (National youth organisation) की स्थापना की थी। भगत सिंह ने राजगुरु के साथ मिलकर 17 दिसंबर 1928 को लाहौर में सहायक पुलिस अधीक्षक रहे अंग्रेज अधिकारी जेपी सांडर्स को मारा था। जेल में भगत सिंह करीब 2 साल तक रहे थे। जेल में भगत सिंह व उनके साथियों ने 64 दिनों तक भूख हड़ताल की थी। उनके एक साथी “यतींद्र नाथ दास” ने तो भूख हड़ताल में अपने प्राण त्याग दिए थे। 23 मार्च 1931 को शाम के करीब 7: 33 मिनट पर भगत सिंह तथा उनके दो साथियों सुखदेव व राजगुरु को फांसी दे दी गई। जब भगत सिंह की उम्र मात्र साढ़े 19 वर्ष थी। इतनी कम उम्र में भगत सिंह ने अपने आप को बलिदान कर दिया। भगत सिंह ने “इंकलाब जिंदाबाद”का नारा दिया था। भगत सिंह को फांसी की सजा सुनाने वाले न्यायाधीश जेसी हिल्टन थे। भगत सिंह ने कहा,
“मेरे सीने में जो जख्म है वह सब फूलों के गुच्छे हैं।
हमें तो पागल ही रहने दो, हम पागल ही अच्छे हैं।”
विनायक दामोदर सावरकर जिनको हम वीर सावरकर के नाम से जानते हैं। उनका जन्म 28 मई 1883 में हुआ था। तथा उनकी मृत्यु 26 फरवरी 1966 को हुई थी। जीवन के 30 साल इन्होंने जेल में ही बिता दिये। अंग्रेजी सरकार ने इन्हें कठोर यातनाएं दी। सेल्यूलर जेल जो की कठोर यातनाओं के लिए प्रसिद्ध थी। सेल्यूलर जेल में इनको 10 साल रखा । वहां पर कोल्हू के बैल की तरह सरसों व नारियल आदि का तेल निकालना पड़ता था। यदि कोई कैदी थक कर रुक जाता तो कोड़ों व बैंत से पिटाई की जाती थी। ऐसी कठोर कष्टों को हमारे स्वतंत्र सेनानी वीर सावरकर ने सहन करा लेकिन उनकी आजादी का जज्बा कम नहीं हुआ।
इस तरह लाखों लोगों के बलिदान के बाद हमें आजादी मिली। ऐसे शहीद जिन्होंने अपने जीवन के 30 साल जेलों में बता दिए। आज भी उनकी तस्वीर सम्मान के लिए तरसती है। आज हमें अपने भारतीय होने पर गर्व होना चाहिए कि हम एक स्वतंत्र देश के निवासी हैं। देश व देश के नागरिकों के प्रति हमारी निष्ठा होनी चाहिए। आज हमें अपनी एकता को मजबूत करने की जरूरत है।
हमें गर्व है कि हम भारतीय हैं।
हर्षवर्धन शर्मा (मार्मिक धारा)