उदयपुर में मावली इलाके में सोमवार देर शाम कोरोना से किशोर की मौत की खबर से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। किशोर की मौत के 24 घंटे बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जानकारी छुपाते रहे। यहां तक कि जिला कलेक्टर चेतन देवड़ा को भी देर रात तक इस मामले की जानकारी नहीं थी।
कोरोना की तीसरी लहर को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पहले से ही विशेष सतर्कता बरत रही है। स्वास्थ्य विभाग सहित जिला प्रशासन को फुल अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन उदयपुर का स्वास्थ्य विभाग शायद अब तक गंभीर नहीं हुआ है। जानकारी के अनुसार मावली तहसील के देवाली गांव निवासी 16 वर्षीय किशोर को निमोनिया की शिकायत होने पर 22 जुलाई को कोविड टेस्ट करवाया गया था। टेस्ट रिपोर्ट के पॉजिटिव आने पर बालक को पहले तो घर पर ही इलाज चला। सांस लेने में ज्यादा तकलीफ होने पर उसे एमबी अस्पताल में भर्ती कराया गया। कॉविड संक्रमण से जूझ रहे किशोर ने आईसीयू में इलाज के दौरान 25 जुलाई को देर रात दम तोड़ दिया। आनन-फानन में चिकित्सा विभाग ने कोरोना प्रोटोकॉल के तहत शव को पैक कर परिजनों को सौंप कर गांव में ही अंतिम संस्कार भी करवा दिया।
इतना ही नहीं चिकित्सा विभाग ने किशोर की मौत के बाद परिजनों सहित उसके संपर्क में 18 लोगों के कोविड टेस्ट के लिए सैंपल भी लिए हैं। मृतक मावली के देवाली गांव का रहने वाला था। सांगवा में राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ता था। हालांकि मृतक के कोरोना से पहले स्क्रब टाइफस होने की बात सामने आई है।
चिकित्सा विभाग छुपाता रहा जानकारी-
किशोर ने रविवार देर शाम को ही इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। लेकिन सीएमएचओ सहित चिकित्सा विभाग के आला अधिकारी 24 घंटे बाद भी मामले को दबाते रहे। मीडिया द्वारा सीएमएचओ डॉ दिनेश खराड़ी मावली बीसीएमएचओ मनोहर सिंह यादव से जानकारी मांगी गई। दोनों जिम्मेदार जानकारी देने से बचते रहे। ऐसे में कोरोनावायरस की तीसरी लहर से पहले उदयपुर में चिकित्सा विभाग की मुस्तैदी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अजय सिंह भाटी (मार्मिक धारा)